गया, नवादा और जहानाबाद के किसानों की जीवनरेखा बनी ढाढ़र सिंचाई परियोजना

Amit Singh
- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

पटना/गया, 10 जून। बिहार के गया जिले में स्थित ढाढ़र सिंचाई परियोजना आज गया, नवादा और जहानाबाद के लाखों किसानों के लिए जीवनरेखा बन चुकी है। वर्षों से पानी की कमी और सुखाड़ की मार झेल रहे किसानों को अब खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल रहा है। वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा इस परियोजना का उद्घाटन किया गया था, जिसके बाद से इसका लाभ लगातार किसानों तक पहुंच रहा है।

गया जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत सोहजना दोनैया गांव के पास ढाढ़र नदी पर बने बैराज से नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है। यह परियोजना बिहार के तीन जिलों गया, नवादा और जहानाबाद के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है।

किसानों के लिए वरदान साबित हो रही परियोजना

फतेहपुर खंड के मसोहजना क्षेत्र के समीप ढाढ़र नदी पर 138 मीटर लंबे बैराज का निर्माण बिहार-झारखंड विभाजन से पहले ही पूरा कर लिया गया था। तिलैया-ढाढ़र अपसरण योजना के तहत झारखंड स्थित तिलैया जलाशय से 1.40 लाख एकड़ फीट पानी नहरों के जरिए ढाढ़र नदी तक लाने की योजना बनाई गई थी।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

इस परियोजना के माध्यम से गया और नवादा जिलों के लगभग 31,700 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया था। वर्तमान में ढाढ़र नदी से मिलने वाले जल के जरिए बायीं मुख्य नहर और उसकी शाखाओं द्वारा करीब 6,900 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की सिंचाई की जा रही है। हालांकि, शेष 24,800 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बहाल करने के लिए तिलैया जलाशय से अतिरिक्त पानी की आवश्यकता बनी हुई है।

300 करोड़ की लागत से बनी परियोजना

करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस परियोजना को स्थानीय लोग भले ही “बरसाती नाला” कहकर पुकारते हों, लेकिन किसानों के लिए यह परियोजना जीवनदायिनी साबित हो रही है। मानसून के दौरान नदियों का जल बैराज तक पहुंचता है और वहां से विभिन्न नहरों एवं शाखाओं में छोड़ा जाता है, जिससे खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचता है।

पहले ‘तिलैया-ढाढ़र सिंचाई परियोजना’ के नाम से थी पहचान

शुरुआत में इस योजना को “तिलैया-ढाढ़र सिंचाई परियोजना” के नाम से जाना जाता था। यह बिहार के कई जिलों के किसानों के लिए अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना मानी जाती थी। लेकिन इसकी प्रक्रिया शुरू से ही जटिलताओं से घिरी रही। वर्ष 2000 में बिहार-झारखंड विभाजन के बाद यह परियोजना अधर में लटक गई, क्योंकि इसका मुख्य जल स्रोत झारखंड के तिलैया डैम से जुड़ा था।

झारखंड अलग होने के बाद वहां की सरकार ने पानी देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण परियोजना लंबे समय तक प्रभावित रही। इसके बाद समाजसेवियों और किसानों ने गया, पटना और दिल्ली तक आंदोलन चलाकर इस परियोजना को फिर से शुरू कराने की मांग उठाई।

सत्यभामा देवी की पहल से मिली थी दिशा

जानकारों के अनुसार, ढाढ़र सिंचाई परियोजना की नींव 1960-70 के दशक में रखी गई थी। वर्ष 1964 में जहानाबाद की तत्कालीन सांसद सत्यभामा देवी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की रूपरेखा तैयार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उस समय गया जिले में सूखे की गंभीर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे केंद्रीय मंत्री के.एन. राव के समक्ष सत्यभामा देवी ने इस परियोजना का प्रस्ताव रखा था। उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 1974 में इस योजना को अंतिम रूप दिया गया।

1984 में हुआ था शिलान्यास

20 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह ने फतेहपुर प्रखंड के सोहजना दोनैया गांव के समीप ढाढ़र नदी पर सिंचाई परियोजना का शिलान्यास किया था। उस समय इस परियोजना को वर्ष 1990 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। शुरुआती दौर में परियोजना के लिए 13 करोड़ 43 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन कार्य की रफ्तार धीमी रहने के कारण समय पर इसका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच सका।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

तिलैया-ढाढ़र सिंचाई परियोजना को पूरा कराने के लिए समाजसेवी महेंद्र सिंह अधिवक्ता ने लंबी कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ी। वर्ष 1998 में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने आर्थिक समस्याओं का हवाला देते हुए परियोजना को नौवीं पंचवर्षीय योजना में शामिल किया और करीब 30 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई।

खरीफ फसलों को मिल रहा बड़ा लाभ

विभागीय सूत्रों के अनुसार खरीफ मौसम में सोहजना दोनैया बैराज से लगभग 739 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। यह पानी नहरों और उनकी शाखाओं के जरिए खेतों तक पहुंचता है, जिससे किसानों की धान समेत अन्य खरीफ फसलों की सिंचाई हो पाती है।

हालांकि अभी यह लाभ मुख्य रूप से खरीफ फसलों तक ही सीमित है, लेकिन परियोजना का पूर्ण विस्तार होने पर सिंचाई क्षमता कई गुना बढ़ सकती है। इसके साथ ही इस परियोजना से भविष्य में 60 मेगावाट बिजली उत्पादन का भी लक्ष्य रखा गया है।

किसानों की उम्मीदों का केंद्र बनी परियोजना

ढाढ़र सिंचाई परियोजना ने गया, नवादा और जहानाबाद के किसानों को नई उम्मीद दी है। वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे किसानों को अब सिंचाई के लिए स्थायी व्यवस्था मिल रही है। यदि तिलैया जलाशय से अतिरिक्त पानी उपलब्ध हो सके, तो यह परियोजना बिहार के कृषि क्षेत्र में नई क्रांति ला सकती है।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →
Share This Article