बिहार की वित्तीय स्थिति पर तेजस्वी यादव का बड़ा हमला, कहा-‘कंगाली की कगार पर पहुंचा राज्य

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 12 जून। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर जारी एक विस्तृत पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि एनडीए सरकार की “दिवालिया राजनीति, कमजोर वित्तीय प्रबंधन और अदूरदर्शी नीतियों” के कारण बिहार आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है।

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती तीन महीने के भीतर ही सरकार को सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसे नियमित भुगतान के लिए बिहार आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से 3,662 करोड़ रुपये निकालने पड़े हैं, जो राज्य की खराब वित्तीय स्थिति का संकेत है।

‘रूटीन भुगतान के लिए क्यों लेना पड़ा आकस्मिकता निधि का सहारा?’

राजद नेता ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन कोई आकस्मिक या आपातकालीन खर्च नहीं है। यह दशकों से नियमित रूप से लाभार्थियों को दी जाने वाली राशि है। ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर ऐसी कौन-सी वित्तीय परिस्थितियां उत्पन्न हुईं, जिनके कारण सामान्य बजटीय प्रावधानों की जगह आकस्मिकता निधि का उपयोग करना पड़ा।

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उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार नियमित खर्चों के लिए भी आकस्मिकता निधि का उपयोग कर रही है, तो विकास योजनाओं और अन्य परियोजनाओं के लिए संसाधन कहां से उपलब्ध होंगे।

संविधान के प्रावधानों का दिया हवाला

तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 267(1) और 267(2) का उल्लेख करते हुए कहा कि आकस्मिकता निधि का उपयोग केवल अप्रत्याशित और आपातकालीन परिस्थितियों में होने वाले खर्चों के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान की भावना के अनुसार यह निधि “अनफोरसीन” यानी अप्रत्याशित खर्चों के लिए बनाई गई है, न कि सामान्य प्रशासनिक और नियमित भुगतानों के लिए।

राजकोषीय घाटे पर भी उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि वर्ष 2025-26 में बिहार का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) 11.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM Act) के तहत यह सीमा 3 प्रतिशत निर्धारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार का राजकोषीय घाटा निर्धारित लक्ष्य से कई गुना अधिक हो चुका है, जो वित्तीय अनुशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

आकस्मिकता निधि के आकार में वृद्धि पर जताई आपत्ति

तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार द्वारा हाल में किए गए उस संशोधन पर भी सवाल उठाया, जिसके तहत किसी वित्तीय वर्ष में राज्य की आकस्मिकता निधि को कुल बजटीय व्यय के 10 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि पहले बिहार आकस्मिकता निधि का आकार 350 करोड़ रुपये था, लेकिन नए प्रावधान के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुमानित बजटीय व्यय 3,24,925 करोड़ रुपये के आधार पर इसे 32,492 करोड़ रुपये से अधिक तक बढ़ाया जा सकता है। राजद नेता ने दावा किया कि ऐसी स्थिति में बिहार की आकस्मिकता निधि का आकार केंद्र सरकार की राष्ट्रीय आकस्मिकता निधि, जो वर्तमान में 30,000 करोड़ रुपये है, से भी बड़ा हो सकता है।

‘यह समानांतर बजट व्यवस्था नहीं बन सकती’

तेजस्वी यादव ने कहा कि आकस्मिकता निधि का उद्देश्य अचानक उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों में तत्काल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। इसे समानांतर बजट या वैकल्पिक खजाने के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर ऐसी कौन-सी संभावित परिस्थितियां हैं, जिनके लिए आकस्मिकता निधि को हजारों करोड़ रुपये तक बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गई।

सरकार से मांगा जवाब

अपने सोशल मीडिया पोस्ट के अंत में तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार से वित्तीय स्थिति को लेकर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के सामने यह बताना चाहिए कि नियमित खर्चों के लिए आकस्मिकता निधि का उपयोग क्यों किया जा रहा है और राज्य की वास्तविक वित्तीय स्थिति क्या है। राजद नेता ने आरोप लगाया कि सरकार इन सवालों का जवाब देने के बजाय भ्रामक प्रेस विज्ञप्तियों के जरिए मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।

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