NEWS PR डेस्क: बिहार में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही राज्य के सभी टोल प्लाजा पर एंबुलेंस की व्यवस्था की जाएगी, ताकि सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को तुरंत चिकित्सा सुविधा मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि दुर्घटना के बाद शुरुआती “गोल्डन ऑवर” में इलाज मिलने से मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। यही वजह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और राज्य राजमार्ग (एसएच) के किनारे ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की योजना को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ट्रॉमा सेंटरों के संचालन शुरू होने के बाद प्रत्येक टोल प्लाजा पर स्थायी रूप से एक-एक एंबुलेंस तैनात रहेगी। वहीं, राज्य के 11 उत्क्रमित ट्रॉमा सेंटरों में 15 जुलाई तक आईसीयू सुविधा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में सभी संबंधित जिलों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
तकनीक के जरिए होगी त्वरित मदद
सड़क दुर्घटना प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एनएच एंबुलेंस को टैग करने वाली विशेष तकनीक विकसित की जाएगी। इससे हादसे की सूचना मिलते ही नजदीकी एंबुलेंस को सक्रिय कर घायल को शीघ्र अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। फिलहाल बिहार में 1500 से अधिक सरकारी और 2000 से अधिक निजी एंबुलेंस पंजीकृत हैं। सभी सरकारी एंबुलेंस की मैपिंग की जा चुकी है। वर्तमान व्यवस्था के तहत कॉल मिलने के बाद शहरी क्षेत्रों में औसतन 20 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट के भीतर एंबुलेंस मरीज तक पहुंच रही है।
बिहार के छह जिले ‘जीरो फैटेलिटी’ मिशन में शामिल
सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के सर्वाधिक सड़क दुर्घटना वाले 100 जिलों में बिहार के छह जिले शामिल हैं। इनमें पटना, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर, सारण और पूर्वी चंपारण शामिल हैं। दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए इन जिलों को “जीरो फैटेलिटी जिला” के रूप में चिह्नित किया गया है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से सड़क सुरक्षा, त्वरित चिकित्सा सहायता और जागरूकता कार्यक्रमों पर काम कर रहे हैं।
बढ़ रही है सड़क हादसों में मौतों की संख्या
आंकड़ों के अनुसार, बिहार में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में सड़क हादसों से होने वाली मृत्यु दर में 6.12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे में सरकार की यह नई पहल सड़क सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
