₹1852 करोड़ से बिहार में बनेगी नई रेल लाइन, 17 साल बाद फिर पटरी पर लौटेगी जालालगढ़-किशनगंज रेल परियोजना

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: किशनगंज/पूर्णिया, 16 जून। लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी जालालगढ़-किशनगंज नई रेल लाइन परियोजना के पुनर्जीवित होने की संभावना बढ़ गई है। करीब 17 वर्षों से विभिन्न कारणों से रुकी इस महत्वाकांक्षी योजना को अब केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय फिर से आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटे हैं। रेलवे बोर्ड और उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे परियोजना की संशोधित लागत का अंतिम आकलन कर रहे हैं।

वर्ष 2008-09 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इस रेल परियोजना की आधारशिला रखी थी। उस समय इसकी अनुमानित लागत लगभग 360 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन वर्षों तक कार्य शुरू नहीं होने और निर्माण व भूमि अधिग्रहण खर्च बढ़ने के कारण अब इसकी लागत बढ़कर करीब 1852 करोड़ रुपये पहुंच गई है।

प्रस्तावित रेल मार्ग की लंबाई 51.632 किलोमीटर होगी। यह लाइन पूर्णिया जिले के जालालगढ़ जंक्शन से निकलकर अमौर, बैसा, रौटा, खाताहाट, महीनगांव और दौला जैसे ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ते हुए किशनगंज तक पहुंचेगी। यात्रियों की सुविधा के लिए इस मार्ग पर आठ नए रेलवे स्टेशनों के निर्माण का प्रस्ताव भी शामिल है।

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रेलवे सूत्रों का कहना है कि नई लाइन बनने के बाद न्यू जलपाईगुड़ी और कटिहार के बीच रेल परिचालन को एक नया विकल्प मिलेगा। इससे मौजूदा व्यस्त रेलखंडों पर दबाव कम होगा और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम बन सकेगी। मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों दोनों के संचालन में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

यह परियोजना केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के समानांतर एक वैकल्पिक रेल संपर्क उपलब्ध होने से आपातकालीन परिस्थितियों में सेना और सुरक्षा बलों की त्वरित आवाजाही संभव हो सकेगी।

दूसरी ओर, सीमांचल के बाढ़ प्रभावित ग्रामीण इलाकों को भी इस परियोजना से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। अमौर और बैसा जैसे क्षेत्रों के किसान अपनी मक्का, जूट और धान जैसी कृषि उपज को देश के बड़े बाजारों तक कम लागत और कम समय में पहुंचा सकेंगे। इससे स्थानीय कृषि और व्यापार दोनों को नई मजबूती मिलेगी।

स्थानीय लोगों का मानना है कि रेल संपर्क बेहतर होने से रोजगार, व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे सीमांचल क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

गौरतलब है कि इस परियोजना को तत्कालीन किशनगंज सांसद स्वर्गीय तस्लीमुद्दीन के प्रयासों से मंजूरी मिली थी, लेकिन शिलान्यास के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। अब केंद्र सरकार द्वारा संशोधित लागत के साथ परियोजना को आगे बढ़ाने की पहल से क्षेत्रवासियों में नई उम्मीद जगी है।

बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने भी पुष्टि की है कि जालालगढ़-किशनगंज रेल लाइन परियोजना को लेकर प्रक्रिया जारी है और रेल मंत्रालय की ओर से जल्द ही निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

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