NEWS PR डेस्क: पटना, 17 जून। बिहार में अब अपनी जमीन की मापी कराना पहले से अधिक महंगा हो गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने रैयती भूमि की मापी के लिए नई शुल्क दरें लागू कर दी हैं, जिसके बाद सामान्य और तत्काल दोनों प्रकार की मापी के लिए लोगों को ज्यादा रकम चुकानी होगी।
विभाग की ओर से जारी नई व्यवस्था के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि संशोधित शुल्क व्यवस्था से भूमि मापी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाया जा सकेगा। हालांकि, बढ़ी हुई दरों को लेकर आम लोगों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
नई दरों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में सामान्य मापी के लिए प्रति खेसरा 2,000 रुपये शुल्क तय किया गया है, जबकि अधिकतम शुल्क 8,000 रुपये होगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति खेसरा 1,000 रुपये और अधिकतम 4,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

तत्काल मापी सेवा के लिए भी शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। शहरी इलाकों में तत्काल मापी कराने पर प्रति खेसरा 4,000 रुपये और अधिकतम 16,000 रुपये तक भुगतान करना होगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मापी के लिए प्रति खेसरा 2,000 रुपये तथा अधिकतम 8,000 रुपये शुल्क तय किया गया है।
भूमि मापी का उपयोग अक्सर दाखिल-खारिज, बंटवारा, सीमांकन और भूमि विवादों के समाधान जैसे कार्यों में किया जाता है। ऐसे में नई दरें लागू होने के बाद आम भू-धारकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि यदि बढ़े हुए शुल्क के बदले विभाग समय पर और निष्पक्ष तरीके से मापी का कार्य पूरा कराता है, तो इससे लोगों को राहत भी मिल सकती है। फिलहाल नई शुल्क व्यवस्था को लेकर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में चर्चा तेज है।
