NEWS PR डेस्क: मधुबनी, 20 जून । जिले में संभावित बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रशासन ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में जिला आपदा प्रबंधन शाखा में अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) संतोष कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों द्वारा की गई बाढ़ पूर्व तैयारियों का जायजा लिया गया।
बैठक में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) के वरिष्ठ सलाहकार जीवन कुमार ने जिले में बाढ़ से निपटने के लिए की जा रही तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (District Emergency Operation Centre) का निरीक्षण कर उपलब्ध संसाधनों, संचार व्यवस्था तथा आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की स्थिति का भी अवलोकन किया।
समीक्षा बैठक के दौरान बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान, तटबंधों की सुरक्षा, सामुदायिक आधारित आपदा प्रबंधन योजना, निकासी एवं पुनर्वास व्यवस्था, राहत सामग्री की उपलब्धता, सामुदायिक रसोई संचालन, पेयजल एवं स्वच्छता (WASH) व्यवस्था, पशु आश्रय स्थलों की पहचान, स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी, जन-जागरूकता अभियान तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों द्वारा की गई तैयारियों की जानकारी प्रस्तुत की। स्वास्थ्य, बाल विकास, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, जनसंपर्क और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने संभावित आपदा के दौरान त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए अपनी कार्ययोजनाओं से अवगत कराया।
अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) संतोष कुमार ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि बाढ़ पूर्व तैयारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए तथा सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और प्रभावी राहत-बचाव कार्य प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
बैठक में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस) ललिता कुमारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी (डीएसओ), जिला जनसंपर्क पदाधिकारी (डीपीआरओ) परिमल कुमार सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन का कहना है कि मानसून के मद्देनजर सभी आवश्यक तैयारियों की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि संभावित बाढ़ की स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके और प्रभावित लोगों को समय पर राहत उपलब्ध कराई जा सके।
