NEWS PR डेस्क: पटना, 25 जून। बिहार सरकार ने राज्य को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य में एआई आधारित तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए सरकार जल्द ही देश और दुनिया की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ साझेदारी करेगी। इस संबंध में बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
कैबिनेट की बैठक के बाद सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने एआई तकनीक के विकास और उसके व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए चार प्रमुख संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने का निर्णय लिया है। इनमें गूगल क्लाउड इंडिया, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, सर्वम और को-रोवर शामिल हैं।
सरकार का उद्देश्य एआई तकनीक को आम नागरिकों, छात्रों, शोधकर्ताओं और सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाना है, ताकि प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़े और नागरिक सेवाएं अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बन सकें। इसके तहत कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, यातायात प्रबंधन, पर्यटन, वित्तीय सेवाओं तथा लोक सेवा वितरण जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान विकसित किए जाएंगे।

नई पहल के तहत सरकारी अधिकारियों और तकनीकी कर्मियों को आधुनिक एआई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक और मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए विशेष एआई पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे। शिक्षकों और प्रशिक्षकों को भी इस क्षेत्र में दक्ष बनाने की योजना है, ताकि राज्य में एआई विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार हो सके।
सरकार शोध और नवाचार को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दे रही है। भारतीय भाषाओं और स्थानीय बोलियों पर आधारित एआई अनुसंधान के लिए शोधकर्ताओं को तकनीकी और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। इससे क्षेत्रीय भाषाओं में डिजिटल समाधान विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
इन समझौतों के जरिए बिहार में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती देने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की भी योजना है। सरकार का मानना है कि एआई आधारित उद्योगों और नवाचार केंद्रों के विकास से युवाओं को नई संभावनाएं मिलेंगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
इसके अतिरिक्त सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना, डेटा सुरक्षा, क्लाउड नीति निर्माण और नागरिक सेवाओं के लिए एकीकृत डेटा प्लेटफॉर्म विकसित करने में भी इन कंपनियों का सहयोग लिया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह पहल बिहार को डिजिटल परिवर्तन और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में मददगार साबित होगी।
