बिहार में इको-टूरिज्म का होगा विस्तार, 50 नए पर्यटन स्थलों को विकसित करेगी सरकार, कैमूर बनेगा बिहार का दूसरा टाइगर र‍िजर्व

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 06 जुलाई। बिहार सरकार ने राज्य को इको-टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पर्यटन विभाग ने 50 से अधिक नए इको-टूरिज्म स्थलों की पहचान की है और अगले पांच वर्षों में राज्य में ऐसे पर्यटन स्थलों की संख्या बढ़ाकर 60 से 70 तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। सरकार का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

राज्य में फिलहाल वाल्मीकि टाइगर रिजर्व इको-टूरिज्म का सबसे बड़ा आकर्षण है। बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व होने के कारण यह देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। नेपाल सीमा से सटे इस क्षेत्र के घने जंगल, बाघ, हाथी और समृद्ध जैव विविधता इसे विशेष पहचान दिलाते हैं।

सरकार अब कैमूर को राज्य के दूसरे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। अपने झरनों, पहाड़ी इलाकों और ट्रैकिंग रूट्स के लिए प्रसिद्ध कैमूर को भविष्य के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में तैयार किया जा रहा है।

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इसके अलावा भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य, गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य, विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य, कांवर झील पक्षी अभयारण्य, राजगीर, ककोलत जलप्रपात, घोड़ा कटोरा, बराबर-गुरुपा पहाड़ियां और सूरजपुर वेटलैंड जैसे स्थलों का भी चरणबद्ध तरीके से विकास किया जा रहा है।

पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा कि सरकार स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन मॉडल को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में पर्यटन क्षेत्र के माध्यम से करीब 20 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कई परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। सहरसा की मत्स्यगंधा झील पर सॉवेनियर शॉप, सुपर ट्री, ग्लास ब्रिज और एक्सपीरियंस सेंटर जैसी सुविधाएं वर्ष 2026 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं पश्चिम चंपारण के लव-कुश पार्क और वाल्मीकिनगर में प्रस्तावित आइकॉनिक टूरिज्म पार्क का विकास कार्य वर्ष 2027 तक पूरा करने की योजना है।

सरकार मां मुंडेश्वरी धाम के आसपास भी पर्यटन गतिविधियों का विस्तार करेगी। यहां धर्मशाला के बेहतर उपयोग के साथ जंगल सफारी और इको-टूरिज्म आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने की तैयारी है।

पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विकसित किए जा रहे सभी इको-टूरिज्म स्थलों पर नेचर ट्रेल, वॉच टावर, इको-कॉटेज, होमस्टे, डिजिटल साइनेज और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।

वर्तमान में बिहार में करीब 10 से 15 इको-टूरिज्म स्थल सक्रिय हैं, जबकि 24 से अधिक प्रमुख प्राकृतिक स्थलों के विकास का कार्य विभिन्न चरणों में जारी है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बिहार देश के प्रमुख इको-टूरिज्म राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।

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