बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आज राज्य में प्रस्तावित 2×700 MWe क्षमता वाले प्रेशराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की प्रगति एवं अद्यतन स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों एवं ‘नेट-ज़ीरो’ उद्देश्यों के अनुरूप बिहार सरकार राज्य में विश्वसनीय बेस-लोड विद्युत उत्पादन के लिए परमाणु ऊर्जा के विकास की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। बैठक में चार प्रस्तावित स्थलों—बांका (भितिया), नवादा (रजौली), सीवान (दरौली) एवं बांका (शंभूगंज)—की तकनीकी, भूमि एवं जल उपलब्धता से संबंधित विभिन्न पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि 2×700 MWe क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सतत शीतलन (Cooling) व्यवस्था के लिए प्रतिवर्ष लगभग 80 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) जल की आवश्यकता होती है, जिसमें लगभग 58 मिलियन क्यूबिक मीटर जल की खपत होगी तथा लगभग 22 मिलियन क्यूबिक मीटर विकिरण-मुक्त जल पुनर्चक्रित (Recycle) होकर पुनः स्रोत में प्रवाहित होगा, जिसका उपयोग सिंचाई सहित अन्य उपयुक्त कार्यों में किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त प्रत्येक परियोजना स्थल के लिए लगभग 1000 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी।
विभिन्न प्रस्तावित स्थलों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। बांका के भितिया साइट (NTPC) के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा बदुआ जलाशय से 80 MCM/वर्ष जल उपलब्धता हेतु अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) तथा वन विभाग द्वारा आवश्यक स्वीकृति प्रदान किए जाने की जानकारी दी गई। मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को स्थानीय स्तर पर विद्यमान बाधाओं का शीघ्र निराकरण करते हुए परियोजना को आवश्यक प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
नवादा के रजौली साइट (NTPC) के संबंध में NTPC द्वारा अवगत कराया गया कि उक्त स्थल के निकट प्रमुख भ्रंश रेखा (Major Fault Line) की उपस्थिति के कारण परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) के भूकंपीय (Seismic) मानकों के अनुसार यह स्थल परमाणु ऊर्जा परियोजना की स्थापना हेतु उपयुक्त नहीं है।
सीवान के दरौली (NPCIL) तथा बांका के शंभूगंज (NPCIL) स्थलों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि भू-तकनीकी अन्वेषण (Geotechnical Investigation) एवं अन्य प्रारंभिक साइट अध्ययनों को शीघ्र प्रारंभ करने के उद्देश्य से जल संसाधन विभाग से दोनों स्थलों के लिए प्रति वर्ष 80 MCM जल उपलब्धता के संबंध में सशर्त अनापत्ति/आश्वासन (Conditional NOC/Assurance) प्राप्त करने हेतु आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सशर्त अनापत्ति/आश्वासन अंतिम जल आवंटन तथा अन्य वैधानिक एवं तकनीकी स्वीकृतियों के अधीन होगा, जिससे परियोजना के प्रारंभिक कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो।
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि आगामी 12 माह के भीतर आवश्यक नियामकीय स्वीकृतियों (Regulatory Pathways), जैसे—बोरहोल ड्रिलिंग की अनुमति, भूमि का सैद्धांतिक आश्वासन तथा जल आवंटन से संबंधित प्रक्रियाओं को मिशन मोड में पूर्ण किया जाए, ताकि केंद्र सरकार से परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति शीघ्र प्राप्त की जा सके।
बैठक में ऊर्जा विभाग, जल संसाधन विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के वरीय पदाधिकारियों सहित NTPC एवं NPCIL के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
