NEWS PR डेस्क:बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नीट पेपर लीक और पटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा गरमा गया। विपक्षी विधायकों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए सदन की कार्यवाही बाधित कर दी। कई विधायक वेल में पहुंच गए, जबकि विधानसभा परिसर के बाहर भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा।

कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी विधायक बैनर और पोस्टर लेकर विधानसभा परिसर पहुंचे। पोर्टिको में सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए और बाद में विधायक विधानसभा के निकट धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान “भाजपा हटाओ, शिक्षा बचाओ” के नारे लगाए गए। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई।
विपक्षी विधायकों के हाथों में ऐसे पोस्टर और बैनर थे जिन पर लिखा था— “10 वर्षों में 152 पेपर लीक क्यों, भाजपा सरकार जवाब दो”, “छात्रों की है एक ही मांग, पारदर्शी परीक्षा और सम्मान”, “छात्रों पर पुलिस बर्बरता नहीं चलेगी” और “सड़क पर उतरे छात्र, न्याय की है सिर्फ एक बात”। इन नारों के जरिए विपक्ष ने परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के साथ पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास किया।
इस बीच भाजपा विधायक श्याम बाबू यादव ने सदन में प्रदर्शन को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि डाकबंगला चौराहे पर बुधवार को प्रदर्शन करने वाले छात्र नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों से जुड़े गुंडे थे। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उन पर और उनके सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया गया। उनके अनुसार, यदि समय रहते सुरक्षा नहीं मिलती तो उनकी जान भी जा सकती थी।
वहीं, राजद विधायक बोगो सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में “हिटलरशाही” का माहौल है और सरकार को युवाओं तथा आम जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक दोषियों के बजाय छात्रों को ही निशाना बना रही है।
