NEWS PR डेस्क : बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रदेश की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। एक तरफ सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के आसार हैं, तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को बड़ा राजनीतिक झटका लगने जा रहा है।

RJD के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे। पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाएंगे। खुद मृत्युंजय तिवारी ने मीडिया से बातचीत में भाजपा में शामिल होने की पुष्टि की है।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले इस घटनाक्रम को RJD के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी छोड़ने के फैसले पर तिवारी ने कहा कि वह पिछले कई महीनों से शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी बातें और सुझाव रखते रहे, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने दावा किया कि करीब 20 वर्षों तक उन्होंने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ RJD के लिए काम किया, लेकिन बदले में उन्हें लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ा। तिवारी के मुताबिक, पार्टी में कार्यकर्ताओं की बात सुनने की परंपरा कमजोर होती जा रही है और उनकी पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया गया। यही वजह रही कि उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।
गौरतलब है कि मृत्युंजय तिवारी ने 16 जुलाई को RJD के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। उस समय प्रदेश अध्यक्ष ने उनसे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के लौटने तक इंतजार करने का आग्रह किया था। इसके बाद उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी से भी मुलाकात की। हालांकि, वरिष्ठ नेताओं की तमाम कोशिशों के बावजूद तिवारी अपना फैसला बदलने को तैयार नहीं हुए और अंततः भाजपा में शामिल होने का निर्णय ले लिया।
उधर, बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के अंतिम दिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की लगातार गैरहाजिरी भी चर्चा का विषय बनी रही। भाजपा और जदयू के नेताओं ने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के दौरान तेजस्वी यादव सदन में मौजूद नहीं रहे। वहीं, राजद की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इधर, RJD के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का भाजपा में शामिल होना भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले हुए इस घटनाक्रम को बिहार की राजनीति में अहम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि राजद इस घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाता है और इसका आगामी राजनीतिक समीकरणों पर कितना असर पड़ता है।
