NEWS PR डेस्क: सीतामढ़ी, 26 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बिहार के सीतामढ़ी जिले की अनूठी प्लास्टिक कचरा प्रबंधन पहल का उल्लेख करते हुए उसकी खुलकर प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने सिंगल यूज प्लास्टिक को पुनर्चक्रित कर इको-फ्रेंडली फर्नीचर तैयार करने के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक पहल बताया।
प्रधानमंत्री की सराहना के बाद सीतामढ़ी का यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। जिले के बाजपट्टी प्रखंड में स्थापित वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट प्लास्टिक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने का सफल उदाहरण पेश कर रही है। यहां करीब 40 किलोग्राम सिंगल यूज प्लास्टिक को रिसाइकिल कर एक मजबूत और टिकाऊ सिटिंग बेंच तैयार की जा रही है।
इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन ने बक्सर की राय इंडस्ट्रीज के साथ व्यावसायिक समझौता किया है। अब तक यूनिट में संग्रहित 4,000 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण कर पहले चरण में 85 आकर्षक सिटिंग बेंच तैयार की जा चुकी हैं। इन बेंचों को जिले की विभिन्न पंचायतों, पंचायत सरकार भवनों और सरकारी विद्यालयों में उपयोग के लिए उपलब्ध कराया गया है।

इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि प्रत्येक बेंच के निर्माण में लगभग 2,000 रुपये की लागत की बचत हो रही है। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह पहल स्थानीय निकायों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो रही है।
लोहिया स्वच्छ अभियान के तहत बाजपट्टी के अलावा रुन्नीसैदपुर, डुमरा और रीगा में भी प्लास्टिक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की गई हैं। बाजपट्टी में उत्पादन जारी है, जबकि अगले महीने से रुन्नीसैदपुर यूनिट में भी प्लास्टिक कचरे से बेंच और अन्य फर्नीचर बनाने का कार्य शुरू होने की तैयारी है।
जिलाधिकारी रिची पांडेय ने तैयार बेंचों का वितरण पंचायतों और पंचायत सरकार भवनों में कराया है। वहीं, राष्ट्रीय नियोजन कार्यक्रम के निदेशक शशिकांत शर्मा ने बताया कि बाजपट्टी यूनिट के लिए अब तक करीब 11 हजार किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया जा चुका है और जिले में प्रतिदिन 500 से 600 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा संग्रहित हो रहा है।
सीतामढ़ी का यह मॉडल न केवल स्वच्छता अभियान को नई गति दे रहा है, बल्कि यह भी साबित कर रहा है कि यदि कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाए तो वही अपशिष्ट समाज के लिए उपयोगी संसाधन बन सकता है। प्रधानमंत्री की सराहना के बाद इस पहल को देश के अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल माना जा रहा है।
