NEWS PR डेस्क: पटना, 27 जुलाई। बिहार की राजनीति में सोमवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता, सीतामढ़ी के पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री अर्जुन राय ने पार्टी छोड़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें और कई अन्य नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई।
भाजपा में शामिल होने के बाद अर्जुन राय ने कहा कि उन्होंने हमेशा जनता की सेवा को राजनीति का उद्देश्य माना है। उनका विश्वास है कि बिहार के विकास और जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए डबल इंजन की सरकार सबसे बेहतर विकल्प है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और बिहार भाजपा की कार्यशैली से प्रभावित होकर उन्होंने यह फैसला लिया है। उनके मुताबिक, राज्य के विकास को गति देने के लिए भाजपा के साथ मिलकर काम करना जरूरी है।

इससे पहले रविवार को सीतामढ़ी के चांदनी चौक स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में अर्जुन राय ने भाजपा में शामिल होने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद अब लालू प्रसाद की मूल विचारधारा और नीतियों से दूर चला गया है। इसी कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, जनता के हित और बिहार के विकास को प्राथमिकता देते हुए भाजपा के साथ जुड़ना समय की मांग है।
अर्जुन राय ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद अब लालू प्रसाद यादव की मूल सोच और नीतियों से दूर चला गया है। यही वजह है कि उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि जनता के हित और बिहार के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है।
अर्जुन राय के भाजपा में शामिल होने को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजद के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। वहीं भाजपा इसे अपने संगठन के विस्तार और राज्य में बढ़ते जनसमर्थन का संकेत मान रही है।