NEWS PR डेस्क:NEWS PR डेस्क:बिहार की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। पंचायती राज मंत्री और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की मंत्री पद की कुर्सी पर छाया संकट अब टलता नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, विधान परिषद सदस्य (MLC) देवेश कुमार अपने पद से इस्तीफा देने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि वह जल्द ही विधान परिषद के सभापति से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।

सूत्रों की मानें तो देवेश कुमार का यह कदम मंत्री दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद की सीट खाली करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। अगर इस्तीफा स्वीकार हो जाता है, तो दीपक प्रकाश के लिए सदन का सदस्य बनने का रास्ता खुल सकता है।
दोबारा मंत्री बनने के बाद उठे थे सवाल
गौरतलब है कि दीपक प्रकाश पहली बार 20 नवंबर 2025 को बिहार सरकार में मंत्री बनाए गए थे। उस समय वह विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, मंत्री बनने के छह महीने के भीतर उनका किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी था।
हालांकि, इसी बीच 14 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद पूरी कैबिनेट स्वत: भंग हो गई। इसके बाद सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री बने और 7 मई 2026 को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था मामला
दूसरी बार मंत्री बनाए जाने के बावजूद दीपक प्रकाश किसी सदन के सदस्य नहीं थे। इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में सवाल उठाया गया था कि बिना विधायक या विधान पार्षद बने किसी व्यक्ति को दोबारा मंत्री पद पर कैसे बनाए रखा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। कोर्ट की टिप्पणी के बाद उनकी मंत्री पद की कुर्सी पर संकट के बादल मंडराने लगे थे।
देवेश कुमार के इस्तीफे से मिलेगी राहत
अब बीजेपी के एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे की खबर के बाद माना जा रहा है कि दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद पहुंचने का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि, इस्तीफा स्वीकार होने और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। बिहार की राजनीति में इस घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला सरकार और संवैधानिक नियमों से जुड़ा हुआ है।
