पटना : भारत की राजनीति में अगर किसी चुनावी रणनीतिकार का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है, तो वह हैं प्रशांत किशोर। चुनावी अभियानों को डेटा, रिसर्च और जमीनी फीडबैक के दम पर नई दिशा देने वाले PK अब सिर्फ राजनीतिक रणनीतिकार नहीं, बल्कि बिहार की सक्रिय राजनीति का एक मजबूत चेहरा बन चुके हैं। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत के साथ उन्होंने पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा तक का सफर तय किया। इसी के साथ बिहार की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा भी तेज हो गई है।
UN से शुरुआत, राजनीति तक का सफर
बिहार के बक्सर से ताल्लुक रखने वाले प्रशांत किशोर ने पब्लिक हेल्थ के क्षेत्र में काम किया और United Nations (UN) के स्वास्थ्य कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे लेकिन उनकी असली पहचान तब बनी, जब उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के चुनाव अभियान की रणनीति पर काम किया। इसके बाद उन्होंने देश के कई बड़े नेताओं और क्षेत्रीय दलों के लिए चुनावी अभियान तैयार किए। चुनावी रणनीति में डेटा एनालिटिक्स और बूथ स्तर की योजना को नई पहचान दिलाने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
राहुल गांधी के लिए भी तैयार किया था चुनावी ब्लूप्रिंट
प्रशांत किशोर का नाम उस समय भी सुर्खियों में रहा, जब उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के साथ मिलकर राहुल गांधी के लिए एक विस्तृत चुनावी ब्लूप्रिंट तैयार किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रस्तुति में संगठन को मजबूत करने, गठबंधन की रणनीति और चुनावी रोडमैप से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल थे हालांकि बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन नहीं थामा और अपना अलग राजनीतिक रास्ता चुना।
जन सुराज से बांकीपुर तक
बिहार लौटकर प्रशांत किशोर ने जन सुराज अभियान की शुरुआत की। हजारों किलोमीटर की पदयात्रा और लगातार जनसंवाद के बाद उन्होंने जन सुराज को एक राजनीतिक दल के रूप में स्थापित किया। बांकीपुर उपचुनाव उनके लिए सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं थी, बल्कि अपनी राजनीतिक सोच को जनता के बीच साबित करने की भी परीक्षा थी। इस जीत ने यह साबित किया कि PK अब केवल चुनावी रणनीतिकार नहीं, बल्कि मतदाताओं का भरोसा जीतने वाले नेता के रूप में भी उभर रहे हैं।
अब सबकी नजर 2030 बिहार विधानसभा चुनाव पर
बांकीपुर की जीत के बाद राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति में तीसरे मजबूत विकल्प के रूप में उभर पाएंगे? चुनावी रणनीति से लेकर जमीनी राजनीति तक का उनका सफर अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका और जन सुराज की ताकत पर सभी की नजर रहेगी।
