वर्षों की परेशानी दूर करने की पहल, घीवक-घूरन को जोड़ने के लिए बना चचरी पुल; मोहम्मद नौशाद आलम ने उठाया पूरा खर्च

Shreya Raj
घीवक-घूरन गांव को जोड़ता चचरी पुल, ग्रामीणों को मिली राहत।

NEWS PR डेस्क: सुपौल के घीवक गांव के वार्ड नंबर 12 के लोगों की वर्षों पुरानी आवागमन की समस्या को देखते हुए मुखिया प्रत्याशी मोहम्मद नौशाद आलम की पहल पर घीवक गांव को घूरन गांव से जोड़ने के लिए चचरी पुल का निर्माण कराया गया है। गुरुवार को इस चचरी पुल का शुभारंभ किया गया। पुल बनने के बाद स्थानीय लोगों, खासकर स्कूली बच्चों और मस्जिद में नमाज के लिए जाने वाले लोगों को काफी राहत मिली है।

पानी में उतरकर स्कूल जाने को मजबूर थे बच्चे

ग्रामीणों के अनुसार, घीवक गांव और घूरन गांव के बीच रास्ते में पुल नहीं होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे-छोटे स्कूली बच्चों को होती थी। उन्हें रोजाना पानी में उतरकर स्कूल जाना पड़ता था। गंदे पानी से होकर गुजरने के कारण कई बच्चों के बीमार पड़ने की बात भी ग्रामीणों ने कही।

वहीं, पांचों वक्त की नमाज के लिए मस्जिद जाने वाले लोगों को भी आवागमन में परेशानी होती थी। रात के समय किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर उसे दूसरे गांव तक अस्पताल ले जाना भी बेहद मुश्किल हो जाता था।

करीब 100 बांस से बनाया गया चचरी पुल

ग्रामीणों ने बताया कि समस्या की जानकारी मिलने के बाद मोहम्मद नौशाद आलम ने तत्काल पहल की। इसके बाद करीब 100 बांस की मदद से चचरी पुल का निर्माण कराया गया। इस पुल के निर्माण में लगभग 20 हजार रुपये की लागत आने की बात बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पुल निर्माण का पूरा खर्च मोहम्मद नौशाद आलम ने स्वयं उठाया है।

पुल बनने से ग्रामीणों को मिली राहत

वार्ड नंबर 12 के लोगों का कहना है कि चचरी पुल बनने के बाद बच्चों के लिए स्कूल जाना और लोगों के लिए मस्जिद तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। ग्रामीणों ने इस पहल के लिए मोहम्मद नौशाद आलम का आभार जताया है।

ग्रामीणों का कहना है कि चचरी पुल से पैदल आवागमन की समस्या काफी हद तक दूर हुई है, लेकिन चारपहिया वाहनों और अन्य वाहनों के आने-जाने में अभी भी परेशानी बनी हुई है।

मरीजों को आज भी खटिया या चौकी का सहारा

ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक खराब होने पर उसे अस्पताल पहुंचाना अभी भी चुनौती बना हुआ है। चारपहिया वाहन के लिए रास्ता नहीं होने के कारण मरीज को कई बार खटिया या चौकी के सहारे दूसरे गांव तक ले जाना पड़ता है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि भविष्य में इस स्थान पर पक्के पुल का निर्माण कराया जाएगा। इससे घीवक और घूरन गांव के बीच आवागमन की समस्या पूरी तरह खत्म हो सकती है और लोगों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

फिलहाल, करीब 100 बांस से तैयार किया गया यह चचरी पुल दो गांवों को जोड़ने के साथ-साथ वार्ड नंबर 12 के ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत का साधन बन गया है।

सुपौल से रिपोर्टर : अल्ताफ राजा

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