NEWS PR डेस्क: बिहार में आरक्षण की समीक्षा को लेकर चल रहे सियासी विवाद में अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का परिवार भी खुलकर सामने आ गया है। लालू यादव की बेटी और राजद नेता रोहिणी आचार्य ने सिंगापुर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक देश में सामाजिक और आर्थिक असमानता बनी हुई है, तब तक आरक्षण व्यवस्था की किसी भी तरह की समीक्षा करना उचित नहीं है। रोहिणी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और चिराग पासवान के बीच आरक्षण के मुद्दे पर तीखी राजनीतिक बयानबाजी जारी है।
संतोष सुमन की मांग के बाद शुरू हुआ विवाद
आरक्षण को लेकर यह विवाद जीतन राम मांझी के बेटे और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता संतोष कुमार सुमन द्वारा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाने के बाद तेज हुआ। इसके बाद केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी और संतोष सुमन तथा जीतन राम मांझी पर निशाना साधा।
चिराग पासवान ने आरक्षण की समीक्षा के विचार का विरोध करते हुए कहा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है। इस मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता गया और बयानबाजी का दौर तेज हो गया।
रोहिणी आचार्य ने कहा- सामाजिक असमानता खत्म होने तक समीक्षा उचित नहीं
इस पूरे विवाद के बीच रोहिणी आचार्य ने आरक्षण व्यवस्था पर अपना स्पष्ट पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में सामाजिक और आर्थिक गैर-बराबरी मौजूद है, तब तक आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा करना उचित नहीं है।
रोहिणी ने कहा कि आरक्षण केवल किसी तरह की कल्याणकारी योजना नहीं है। यह भारत में सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव और असमानता को दूर करने का एक संवैधानिक और संरचनात्मक माध्यम है। उनके अनुसार, आरक्षण की समीक्षा के मुद्दे को केवल आर्थिक या प्रशासनिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांत को समझना जरूरी है।
‘आरक्षण का उद्देश्य केवल गरीबी दूर करना नहीं’
रोहिणी आचार्य ने कहा कि आरक्षण का मुख्य उद्देश्य केवल गरीबी को दूर करना नहीं है। इसका उद्देश्य उन समुदायों को शासन, प्रशासन, शिक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मुख्यधारा में उचित प्रतिनिधित्व दिलाना है, जिन्हें लंबे समय तक सामाजिक व्यवस्था के कारण मुख्यधारा से दूर रखा गया।
उन्होंने कहा कि जब तक सभी वर्गों को आनुपातिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, समाज में सामाजिक और आर्थिक समरसता स्थापित नहीं होती और गैर-बराबरी की खाई कम नहीं होती, तब तक आरक्षण व्यवस्था के स्वरूप में बदलाव करना उचित नहीं होगा।

बिहार के नेताओं को दी नसीहत
रोहिणी आचार्य ने एक्स पर अपनी पोस्ट के माध्यम से राजनीतिक दलों और नेताओं को भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि कागजों पर प्रगति के दावे किए जाने के बावजूद देश में जमीनी स्तर पर जातिगत भेदभाव और सामाजिक-आर्थिक असमानता आज भी मौजूद है।
उनके मुताबिक, आरक्षण वंचित वर्गों के लिए एक सुरक्षात्मक कवच की तरह काम करता है, जिससे उन्हें बिना किसी पक्षपात और बाधा के आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 का किया जिक्र
लालू यादव की बेटी ने अपने बयान में भारतीय संविधान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संविधान के विशेष रूप से अनुच्छेद 15 और 16 अवसरों की समानता और सामाजिक न्याय की गारंटी देते हैं।
रोहिणी आचार्य के अनुसार, मौजूदा आरक्षण व्यवस्था बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान सभा की उस सोच का परिणाम है, जिसमें वंचित और कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण को राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरी माना गया था।
उप-वर्गीकरण और समीक्षा के खिलाफ रोहिणी का रुख
रोहिणी आचार्य ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा या उसमें बदलाव की कोशिश से वंचित वर्गों की सामाजिक सुरक्षा और अधिकारों में कटौती की आशंका पैदा हो सकती है। उन्होंने वर्तमान आरक्षण प्रावधानों को बिना किसी उप-वर्गीकरण और समीक्षा के यथावत बनाए रखने की बात कही।
उन्होंने कहा कि ऐसा करना सामाजिक संतुलन, न्याय और लोकतंत्र की समावेशी भावना को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है।
चिराग-मांझी विवाद के बीच बढ़ी बिहार की सियासी हलचल
आरक्षण के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच पहले से ही राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। मांझी की ओर से आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए बदलाव की बात की गई है, जबकि चिराग पासवान समीक्षा के विचार का विरोध कर रहे हैं। इस विवाद में अब रोहिणी आचार्य की एंट्री से बिहार की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा और अधिक गर्म हो गया है।