गया के कृष्ण द्वारका मंदिर में भगवान कृष्ण के चार रूपों के दर्शन, नौकरी और संतान प्राप्ति की मनोकामना से पहुंचते हैं भक्त

Shreya Raj
गया के कृष्ण द्वारका मंदिर में भगवान कृष्ण के अद्भुत स्वरूप के दर्शन, श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र।

NEWS PR डेस्क: गया के विष्णुपद क्षेत्र स्थित कृष्ण द्वारका मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। सदियों पुराने इस मंदिर में भगवान द्वारकाधीश की बेहद आकर्षक प्रतिमा विराजमान है। भगवान के दर्शन और पूजा के लिए बिहार और झारखंड के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और भगवान कृष्ण की अद्भुत प्रतिमा के कारण खास पहचान रखता है।

चारों प्रहर अलग-अलग रूप में दर्शन की मान्यता

मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण यहां दिन के चारों प्रहर में अलग-अलग स्वरूप में दर्शन देते हैं। सुबह भगवान के बाल रूप के दर्शन होने की बात कही जाती है। दोपहर में भगवान का अलग स्वरूप माना जाता है। शाम के समय यौवन रूप और रात में प्रौढ़ स्वरूप में भगवान के दर्शन होने की मान्यता है। भक्त इन अलग-अलग स्वरूपों को भगवान कृष्ण की दिव्य लीला से जोड़कर देखते हैं।

नौकरी और बेरोजगारी दूर होने की भी आस्था

मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार मिश्रा के अनुसार, यहां नौकरी और बेरोजगारी दूर होने को लेकर श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है। कई लोग रोजगार और नौकरी की कामना लेकर भगवान कृष्ण के दरबार में पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से भगवान की पूजा और प्रार्थना करने से उनकी मनोकामना पूरी होती है।

संतान प्राप्ति के लिए भी पहुंचते हैं श्रद्धालु

कृष्ण द्वारका मंदिर में संतान प्राप्ति को लेकर भी बड़ी आस्था है। संतान की इच्छा रखने वाले दंपती यहां भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के कारण दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

करीब 300 साल पहले स्थापित हुई प्रतिमा

बताया जाता है कि मंदिर में विराजमान भगवान कृष्ण की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी। मान्यता के अनुसार, करीब 300 वर्ष पहले इस प्रतिमा को मंदिर में स्थापित किया गया था। अष्टधातु की बनी बताई जाने वाली यह प्रतिमा आज भी अपनी चमक और आकर्षक स्वरूप के कारण श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती है।

गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर से भी बताई जाती है समानता

मंदिर की भगवान कृष्ण की प्रतिमा की तुलना गुजरात के प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर की प्रतिमा से भी की जाती है। श्रद्धालु प्रतिमा के स्वरूप में समानता को लेकर भी विशेष आस्था रखते हैं। मंदिर की प्राचीनता, प्रतिमा का स्वरूप और यहां से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं इसे गया के प्रमुख आस्था स्थलों में अलग पहचान देती हैं।

कृष्ण द्वारका मंदिर में भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। कोई नौकरी और रोजगार की कामना लेकर पहुंचता है तो कोई संतान प्राप्ति की इच्छा से पूजा करता है वहीं, कई श्रद्धालु केवल भगवान द्वारकाधीश के अद्भुत स्वरूप के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए यहां आते हैं।

गया से रिपोर्टर : आशीष कुमार

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