भागलपुर में बाढ़ पीड़ितों को स्कूल से बाहर निकालने पर हंगामा, 25 साल से यहीं लेते रहे हैं शरण

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क : गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण भागलपुर में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। घरों में पानी घुसने के बाद सुरक्षित ठिकाने की तलाश में पहुंचे बाढ़ पीड़ितों को उस वक्त परेशानी का सामना करना पड़ा, जब करीब 50 से 60 लोग टीएनबी कॉलेजिएट स्कूल में शरण लेने पहुंचे।

बताया जा रहा है कि शुक्रवार सुबह स्कूल परिसर पहुंचे बाढ़ प्रभावित परिवारों को वहां से जाने के लिए कहा गया। इसके बाद बाढ़ पीड़ितों और स्कूल परिसर में निर्माण कार्य करा रहे ठेकेदार के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते मौके पर गहमागहमी का माहौल बन गया।
25 वर्षों से बाढ़ में स्कूल ही बनता है सहारा
बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि टीएनबी कॉलेजिएट स्कूल उनके लिए कोई नया आश्रय स्थल नहीं है। पिछले करीब 25 वर्षों से जब भी बाढ़ का पानी उनके घरों में घुसता है, वे इसी स्कूल परिसर में अस्थायी रूप से शरण लेते रहे हैं। इस बार भी गंगा का जलस्तर बढ़ने और घरों में पानी घुसने के बाद प्रभावित परिवार अपने जरूरी सामान के साथ स्कूल पहुंचे थे। पीड़ितों के अनुसार, उनकी संख्या करीब 50 से 60 थी।
घर में पानी भर गया, आखिर जाएं तो जाएं कहां?’
स्कूल से जाने की बात कहे जाने के बाद बाढ़ पीड़ितों में नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना था कि घरों में पानी भर चुका है और रहने की कोई दूसरी सुरक्षित जगह नहीं है। ऐसे में वे अपने परिवार को लेकर कहां जाएं? इसी मुद्दे को लेकर स्कूल परिसर में काफी देर तक बहस होती रही। स्थिति को देखते हुए बातचीत के जरिए मामले को शांत कराने की कोशिश की गई।
बाढ़ पीड़ितों को स्कूल में रहने की मिली अनुमति
बाद में मामले में सहमति बनी और बाढ़ प्रभावित लोगों को स्कूल परिसर में रहने की अनुमति दे दी गई। साथ ही कहा गया कि जब तक इलाके में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है और लोगों के घरों में पानी है, तब तक प्रभावित परिवारों को वहां रहने दिया जाना चाहिए। बाढ़ पीड़ितों को रहने, खाने-पीने और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए जाने का भी आश्वासन दिया गया। इसके बाद मौके पर बना तनाव धीरे-धीरे समाप्त हो गया।
बाढ़ ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
भागलपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई परिवारों के सामने सुरक्षित स्थान पर जाने की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में टीएनबी कॉलेजिएट स्कूल में सामने आया विवाद राहत और आश्रय व्यवस्था की गंभीरता को सामने लाता है। आपदा की स्थिति में जिन लोगों के घर पानी में डूब जाते हैं, उनके लिए सुरक्षित आश्रय सबसे बड़ी जरूरत होती है। इसलिए राहत स्थलों पर प्रभावित परिवारों के लिए पर्याप्त जगह और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था जरूरी है।भागलपुर से श्यामानंद सिंह की रिपोर्ट

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