स्वास्थ्य मंत्री का हाजीपुर सदर अस्पताल में औचक निरीक्षण, बिना जांच रेफरल पर जताई नाराजगी

Rashmi Tiwari

स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने वैशाली जिले के एकदिवसीय दौरे के दौरान हाजीपुर सदर अस्पताल, वैशाली का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं, आईसीयू वार्ड, मरीजों के इलाज की व्यवस्था, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति, दवा वितरण प्रणाली सहित अन्य व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया।निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अस्पताल पहुंचने वाले प्रत्येक मरीज को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए। प्राथमिक जांच एवं आवश्यक उपचार किए बिना किसी भी मरीज को रेफर नहीं किया जाए।

इमरजेंसी एवं आईसीयू वार्ड का किया निरीक्षण

स्वास्थ्य मंत्री ने सबसे पहले अस्पताल के इमरजेंसी एवं आईसीयू वार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के ड्यूटी रोस्टर, उपस्थिति पंजी और मरीजों को दी जा रही चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने वार्ड में भर्ती मरीजों से सीधे संवाद कर अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज की गुणवत्ता का फीडबैक लिया। एक बुजुर्ग मरीज ने अस्पताल में मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की सराहना की।

बिना प्राथमिक जांच मरीजों को रेफर करने पर जताई नाराजगी

माइनर ओटी एवं रेफरल पंजी की जांच के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने पाया कि कुछ मरीजों को प्राथमिक जांच एवं आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी किए बिना ही उच्च संस्थानों के लिए रेफर कर दिया गया था। जांच में सामने आया कि डॉ. सुमन आनंद द्वारा मीना देवी को बिना किसी प्राथमिक जांच के रेफर किया गया।

वहीं, डॉ. रतन प्रकाश द्वारा अमित कुमार के मरीज को केवल पेट दर्द की शिकायत के आधार पर बिना आवश्यक जांच के रेफर कर दिया गया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर करना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने संबंधित मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा रेफरल की पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड एवं दस्तावेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि रेफरल तभी किया जाए, जब मरीज की वास्तविक चिकित्सकीय आवश्यकता हो।

अस्पतालों में उपलब्ध बेड, दवा एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी ऑनलाइन एवं रियल टाइम अपडेट रखी जाए, ताकि मरीजों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

डॉक्टर की अनुपस्थिति पर मांगी जानकारी

निरीक्षण के दौरान आईसीयू में तैनात डॉ. सौरभ प्रकाश के अनुपस्थित रहने का मामला भी सामने आया। स्थानीय जानकारी के अनुसार उनके न्यायालय जाने की बात बताई गई। स्वास्थ्य मंत्री ने संबंधित चिकित्सक से न्यायालय द्वारा जारी समन एवं आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

दवा वितरण एवं स्टॉक रजिस्टर की जांच

स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल के दवा काउंटर और स्टॉक व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। इस दौरान पाया गया कि ऑनलाइन दवा प्रविष्टियां की जा रही थीं, लेकिन ऑफलाइन स्टॉक रजिस्टर (भंडार पंजी) पूरी तरह अपडेट नहीं था। निरीक्षण में फार्मासिस्ट विवेक वर्धन के स्टॉक रजिस्टर में कमी पाई गई। स्वास्थ्य मंत्री ने इस पर असंतोष व्यक्त करते हुए ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों में दवाओं का सटीक और अद्यतन रिकॉर्ड रखने का निर्देश दिया।

उन्होंने एंटी-रेबीज एवं अन्य आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं के स्टॉक की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा।

मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश

स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अस्पतालों में आने वाले प्रत्येक मरीज को बेहतर, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध इलाज मिले। किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या चिकित्सकीय लापरवाही के कारण मरीजों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता सर्वोच्च प्राथमिकता है। अस्पताल प्रबंधन यह सुनिश्चित करे कि मरीजों को अनावश्यक रेफरल, दवा की अनुपलब्धता या अन्य कारणों से कठिनाई का सामना न करना पड़े।

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