NEWS PR डेस्क:पटना: आयकर विभाग से जुड़े रिश्वत के एक मामले में CBI ने पटना में कार्रवाई करते हुए असिस्टेंट कमिश्नर सुनंदा कुमार और विभागीय क्लर्क को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि एक NGO को आयकर विभाग से जुड़े 12A और 80G प्रमाणपत्र दिलाने के एवज में पैसों की मांग की गई थी। ट्रैप ऑपरेशन के दौरान कथित तौर पर 15 हजार रुपये की रकम बरामद की गई।

CBI की टीम दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई है। गिरफ्तारी के बाद सुनंदा कुमार को CBI टीम के साथ जाते समय चेहरे को ढकते हुए भी देखा गया। दोनों आरोपियों को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किए जाने की बात सामने आई है।
NGO की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
मामले की शुरुआत ‘श्रवण ज्योति विवेकानंद संस्थान’ नामक NGO की शिकायत से हुई। संस्थान के प्रतिनिधि के अनुसार, फरवरी में 12A और 80G प्रमाणपत्र के लिए आयकर विभाग में आवेदन किया गया था। प्रतिनिधि का दावा है कि 9 जून को हुई सुनवाई में उन्हें पहले CA के माध्यम से आगे की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया। इसके बाद अगली सुनवाई के लिए 1 सितंबर की तारीख तय हुई। आरोप के मुताबिक, 1 सितंबर को सुनवाई के दौरान अधिकारी की ओर से सीधे रकम की मांग की गई। NGO प्रतिनिधि ने बताया कि उनसे 75 हजार रुपये अधिकारी के लिए और 10 हजार रुपये स्टाफ के लिए देने को कहा गया था।
शिकायत मिलते ही ACB ने बनाया ट्रैप प्लान
NGO की शिकायत मिलने के बाद CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने मामले की प्रारंभिक जांच की। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के बाद एजेंसी ने ट्रैप ऑपरेशन की योजना तैयार की। बताया गया है कि पटना ACB की टीम ने DSP रुबी चौधरी के नेतृत्व में कार्रवाई को अंजाम दिया।
पहले से तैयार थी CBI की टीम
NGO प्रतिनिधि के अनुसार, कार्रवाई वाले दिन फोन पर बातचीत और अन्य तथ्यों को रिकॉर्ड किया गया। इसके बाद उन्होंने अधिकारी से कुछ समय मांगा और पैसे की व्यवस्था करने की बात कही। प्रतिनिधि के मुताबिक, करीब दो घंटे पहले रकम निकालकर CBI टीम के साथ आयकर गोलंबर स्थित आयकर कार्यालय पहुंचे। तय योजना के तहत जैसे ही रकम दी गई, वहांजांच एजेंसी के सामने आए आरोपों के मुताबिक, असिस्टेंट कमिश्नर ने कथित तौर पर रिश्वत की रकम मौजूद जांच एजेंसी के अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।
अधिकारी के बजाय क्लर्क के जरिए लेने का आरोप
जांच एजेंसी के सामने आए आरोपों के मुताबिक, असिस्टेंट कमिश्नर ने कथित तौर पर रिश्वत की रकम सीधे अपने हाथ में नहीं ली। आरोप है कि पैसे लेने के लिए विभागीय क्लर्क का इस्तेमाल किया गया। ट्रैप के दौरान 15 हजार रुपये अधिकारी के हिस्से और 2500 रुपये स्टाफ के नाम पर लिए जाने की बात शिकायतकर्ता की ओर से कही गई है। शेष रकम बाद में देने की बात सामने आई है।
अब कोर्ट में होगी पेशी
गिरफ्तारी के बाद CBI दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि मामले में और कौन-कौन लोग शामिल थे और रिश्वत से संबंधित पूरी प्रक्रिया किस तरह संचालित की जा रही थी। फिलहाल दोनों आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश किए जाने की तैयारी है। मामले की आगे की जांच CBI ACB की ओर से जारी है।