NEWS PR डेस्क: पटना: एससी-एसटी आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण और ‘कोटे में कोटा’ को लेकर चल रही राजनीतिक बहस अब और तेज होती दिख रही है। इसी क्रम में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के नेता डॉ. संतोष कुमार सुमन ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जो नेता लंबे समय तक सत्ता का हिस्सा रहे हैं, उन्हें दूसरों से सवाल पूछने से पहले अपने कार्यकाल का हिसाब भी सार्वजनिक करना चाहिए।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने विस्तृत संदेश में संतोष सुमन ने महादलितों के लिए किए गए कार्यों और योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके परिवार और पार्टी का कामकाज जनता के सामने है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अब दूसरे लोग भी अपने कार्यों का लेखा-जोखा समाज के सामने रखें। उन्होंने कहा, “हमारी किताब खुली है”, यानी उनसे सवाल करने वालों को भी अपने राजनीतिक कामकाज का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए।
महादलित कल्याण की योजनाओं का दिया हवाला
संतोष सुमन ने कहा कि उनके पिता और HAM प्रमुख जीतन राम मांझी को जब-जब सरकार में जिम्मेदारी मिली, उन्होंने वंचित और कमजोर तबकों के लिए काम को प्राथमिकता दी। उनके मुताबिक, सत्ता को केवल राजनीतिक पद के तौर पर नहीं देखा गया, बल्कि इसका इस्तेमाल सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए किया गया।
उन्होंने महादलित परिवारों के लिए आवासीय जमीन उपलब्ध कराने की योजना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि करीब 1.95 लाख परिवारों को जमीन के प्लॉट दिए गए। इस दौरान 5,717 एकड़ से अधिक भूमि के वितरण की भी बात कही गई। इसके साथ ही महादलित आवास, स्वच्छता, बच्चों के लिए पोशाक और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं को भी उन्होंने अपने तर्क का आधार बनाया।
लाखों बच्चों और युवाओं को योजनाओं से जोड़ने का दावा
अपने पोस्ट में HAM नेता ने मुख्यमंत्री महादलित पोशाक योजना का जिक्र किया। उनके अनुसार, इस योजना के जरिए लगभग 14.71 लाख बच्चों को पोशाक उपलब्ध कराई गई। वहीं, दशरथ मांझी कौशल विकास योजना के तहत करीब 2.19 लाख महादलित परिवारों के सदस्यों को अलग-अलग व्यवसायिक प्रशिक्षण दिए जाने का दावा किया गया। उनका कहना है कि कौशल विकास के माध्यम से वंचित समुदाय के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की कोशिश की गई।
‘विकास मित्र’ व्यवस्था का भी किया उल्लेख
सरकारी योजनाओं को महादलित परिवारों तक पहुंचाने के लिए बनाई गई ‘विकास मित्र’ व्यवस्था को भी संतोष सुमन ने महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इसके लिए 9,875 पद निर्धारित किए गए थे। बाद में इस व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 50 फीसदी महिला आरक्षण का प्रावधान किया गया। उन्होंने सामुदायिक भवन-सह-वर्कशेड, विकास रजिस्टर, रेडियो वितरण, आंगनबाड़ी केंद्र, क्रेच और मोबाइल मेडिकल सेवाओं जैसी पहलों का भी उल्लेख किया।
11वीं पंचवर्षीय योजना में बड़े निवेश का दावा
संतोष सुमन के मुताबिक, महादलित समुदाय के विकास को ध्यान में रखते हुए 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान ₹3,895.26 करोड़ की परियोजना तैयार की गई थी। उन्होंने इन योजनाओं को महादलितों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान से जोड़ते हुए कहा कि उस दौर में प्राथमिकता लक्षित विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर थी।
आरक्षण के ‘कोटे में कोटा’ से अलग बताया पुराना मॉडल
संतोष सुमन ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि महादलित मॉडल को उस समय सरकारी नौकरियों में एससी आरक्षण के अंदर अलग उप-कोटा के तौर पर लागू नहीं किया गया था। उनके अनुसार, उस पहल का प्रमुख उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ उन समुदायों तक पहुंचाना था, जो विकास की दौड़ में सबसे पीछे रह गए थे।
वर्तमान में एससी आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण और ‘कोटे में कोटा’ की मांग को उन्होंने अलग संवैधानिक और नीतिगत विषय बताया। उनका तर्क है कि ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य किसी वर्ग के मौजूदा अधिकारों को खत्म करना नहीं, बल्कि आरक्षण का लाभ उन लोगों तक पहुंचाना है जिन्हें उसका फायदा अपेक्षाकृत कम मिला है।
बोले- मुद्दा किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं
HAM नेता ने अपने बयान में कहा कि इस मुद्दे को किसी खास व्यक्ति या दल के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय और संविधान से मिले अधिकारों को समाज के सबसे वंचित हिस्से तक पहुंचाने का सवाल बताया। इसी के साथ उन्होंने लंबे समय तक सत्ता में रहे नेताओं से यह सवाल भी किया कि उनके कार्यकाल में दलित और महादलित समाज के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए।
हमारी किताब खुली है’ से साधा निशाना