बैंकों की उदासीनता पर भड़के वित्त मंत्री, बोले- जरूरत पड़ी तो पीएम मोदी से करेंगे शिकायत

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 23 जून। बिहार में बैंकों की ओर से ऋण वितरण में लगातार खराब प्रदर्शन पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की बैठक में उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बैंक अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि बार-बार निर्देश और समीक्षा के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। यदि यही हाल रहा तो मामले की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की जाएगी।

मंगलवार को आयोजित एसएलबीसी बैठक में वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के विकास में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन ऋण वितरण के मामले में अधिकांश बैंक अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों की यह कार्यशैली स्वीकार्य नहीं है और इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का साख-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) केवल 58.68 प्रतिशत दर्ज किया गया। वहीं 3.36 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक साख लक्ष्य के मुकाबले बैंकों ने मात्र 2.84 लाख करोड़ रुपये का ऋण वितरण किया, जो लक्ष्य का 84.71 प्रतिशत है।

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विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने भी बैंकों के प्रदर्शन पर नाराजगी जताई। उन्होंने एसएलबीसी के कन्वेनर बैंक एसबीआई को फटकार लगाते हुए कहा कि लगातार समीक्षा के बावजूद स्थिति में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने बैंक अधिकारियों को अपने प्रदर्शन में तत्काल सुधार लाने की नसीहत दी।

बैठक के दौरान किसानों को ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से बिहार कृषि ऋण पोर्टल का भी लोकार्पण किया गया। वित्त विभाग द्वारा विकसित इस एकीकृत पोर्टल के माध्यम से कृषि ऋण से जुड़ी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने का प्रयास किया गया है।

क्षेत्रवार उपलब्धियों की समीक्षा में कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण 68.03 प्रतिशत तथा एमएसएमई सेक्टर में 84.26 प्रतिशत रहा। वहीं वाणिज्यिक बैंकों का सीडी रेशियो केवल 55.33 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो अधिकारियों की चिंता का प्रमुख कारण बना। इसके विपरीत सहकारी बैंकों ने 168.78 प्रतिशत और लघु वित्तीय बैंकों ने 200 प्रतिशत से अधिक का साख-जमा अनुपात हासिल किया।

बैठक में खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों को चेतावनी दी गई कि यदि ऋण वितरण में सुधार नहीं हुआ तो उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि बिहार के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए बैंकिंग क्षेत्र की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

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