निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई, रिश्वत लेने वाले पूर्व ASI को 3 वर्ष की सजा

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क: निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अनुसंधानित भ्रष्टाचार के एक मामले में विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना द्वारा अभियुक्त को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई गई है। वर्ष 2000 से अब तक के मामलों में यह सजा की महत्वपूर्ण कार्रवाई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई करते हुए न केवल भ्रष्टाचार के मामलों में कांड दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की जा रही है, बल्कि बेहतर अनुसंधान एवं प्रभावी अभियोजन के माध्यम से न्यायालय से दोषियों को सजा दिलाने की कार्रवाई भी निरंतर की जा रही है।

न्यायालय का निर्णय
शुक्रवार (11.09.2026) को अतुल कुमार सिंह, न्यायाधीश, विशेष न्यायालय निगरानी, पटना द्वारा अभियुक्त बद्री राम, तत्कालीन सहायक अवर निरीक्षक (स0अ0नि0), थाना-बिहटा, जिला-पटना को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा धारा 13(2) सह पठित धारा 13(1)(डी) के तहत निगरानी थाना कांड संख्या 60/2011 (विशेष वाद संख्या 44/2011) में दोषी करार दिया गया।
घटना का विवरण
यह मामला परिवादी किशोर कुमार, पिता-भजुमन प्रसाद, साकिन/थाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण की शिकायत पर आधारित है। आरोप था कि अभियुक्त बद्री राम, तत्कालीन सहायक अवर निरीक्षक, थाना-बिहटा, जिला-पटना द्वारा दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को मुक्त कराने के लिए मोटरयान निरीक्षक के यहां जांच हेतु अनुरोध पत्र भेजने के एवज में परिवादी से ₹20,000/- रिश्वत की मांग की गई थी। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान अभियुक्त को 03.09.2011 को ₹13,000/- रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था।
अनुसंधान एवं अभियोजन
इस मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता महेन्द्र कुमार सिन्हा, पुलिस निरीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना द्वारा सटीक एवं समयबद्ध अनुसंधान करते हुए आरोप-पत्र न्यायालय में समर्पित किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में कुल 10 साक्षियों की गवाही कराई गई। बिहार सरकार की ओर से किशोर कुमार सिंह, प्रभारी विशेष लोक अभियोजक, निगरानी, पटना द्वारा प्रभावी ढंग से अभियोजन की पैरवी की गई, जिसके परिणामस्वरूप अभियुक्त को दोषसिद्ध कराने में सफलता प्राप्त हुई।
सुनाई गई सजा
विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना द्वारा अभियुक्त बद्री राम को—भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹13,000/- का अर्थदण्ड लगाया गया है। अर्थदण्ड की राशि जमा नहीं करने पर तीन महीने का साधारण कारावास होगा। दोनों सजा साथ-साथ चलेगी।
अब तक वर्ष 2026 में कुल 20 भ्रष्टाचार के मामलों में न्यायालय द्वारा सजा सुनायी गई है। वर्तमान कांड में दोषसिद्ध की कार्रवाई अतुल कुमार सिंह, न्यायाधीश, विशेष न्यायालय निगरानी, पटना द्वारा की गई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अभियोजन की कार्यवाही लगातार जारी है।
वर्ष 2000 से वर्ष 2024 तक (झारखंड राज्य अलग बनने के बाद से) यह सजा की सबसे अधिक कार्रवाई हुई है। विगत वर्ष 2025 में कुल 30 भ्रष्टाचार के मामलों में माननीय विशेष न्यायालय निगरानी द्वारा सजा सुनाई गई थी।

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