ग्रैंडपेरेंट्स डे पर भावुक हुआ जी.डी. गोयनका पब्लिक स्कूल पूर्णिया, चरण पखारकर बच्चों ने जताया सम्मान

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क : पूर्णिया, “दादा-दादी और नाना-नानी परिवार की वह अनमोल धरोहर हैं, जिनके स्नेह में बचपन मुस्कुराता है और जिनकी सीख से जीवन संवरता है।” इसी भावना को साकार करते हुए जी. डी. गोयनका पब्लिक स्कूल, पूर्णिया में शनिवार को ग्रैंडपेरेंट्स डे का भव्य आयोजन प्रेम, उल्लास, सम्मान और आत्मीयता के वातावरण में किया गया। समारोह दादा-दादी एवं नाना-नानी के स्नेह, अनुभव, ज्ञान और संस्कारों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत पुनीत बिल्डिंग में दादा-दादी एवं नाना-नानी के तिलक और पारंपरिक स्वागत के साथ हुई। इसके पश्चात पोते-पोतियों द्वारा अपने दादा-दादी एवं नाना-नानी के चरण पखारने की भावपूर्ण परंपरा निभाई गई। इस भावुक क्षण ने भारतीय संस्कृति में बड़ों के प्रति आदर, सेवा और कृतज्ञता की भावना को जीवंत कर दिया। बच्चों के स्नेह और सम्मान से अभिभूत बुजुर्गों के चेहरे पर खुशी देखते ही बन रही थी।

इसके बाद विद्यालय परिसर में दादा-दादी, नाना-नानी और बच्चों के लिए संगीतमय तकिया पासिंग, गुब्बारा संतुलन, पिरामिड बनाना तथा साड़ी तह करना जैसी रोचक एवं मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया। सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर न केवल खेलों का आनंद उठाया, बल्कि अपने बच्चों के साथ अनेक खूबसूरत और यादगार पल भी साझा किए।

इसके पश्चात विद्यालय के ओपेरा हाउस में मुख्य समारोह आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. देवी राम जी का तिलक एवं पारंपरिक रीति से स्वागत किया गया। विद्यार्थियों द्वारा उनका परिचय प्रस्तुत करने के बाद शॉल एवं पौधा भेंट कर उन्हें सम्मानित किया गया।

डॉ. देवी राम जी, राजेश अग्रवाल, अशोक सर्राफ, कुमुद गुप्ता, डायरेक्टर-प्रिंसिपल पुलोमा नंदी, उप-प्रधानाचार्य राज कुमार दास एवं समन्वयक इंद्राणी मुखर्जी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर मुख्य समारोह का शुभारंभ किया। इसके पश्चात कक्षा द्वितीय के विद्यार्थियों ने मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों का अभिनंदन किया। डायरेक्टर-प्रिंसिपल पुलोमा नंदी ने अपने स्वागत संबोधन में सभी अतिथियों, दादा-दादी एवं नाना-नानी का अभिनंदन करते हुए परिवार में बुजुर्गों की भूमिका और बच्चों के संस्कार निर्माण में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला में नर्सरी, एल.के.जी. एवं यू.के.जी. के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया। कक्षा द्वितीय के विद्यार्थियों ने मधुर गीत की प्रस्तुति दी। विशेष दृश्य प्रस्तुति के माध्यम से दादा-दादी, नाना-नानी और नाती-पोतों के खूबसूरत रिश्तों एवं उनके साथ जुड़ी अनमोल स्मृतियों को प्रदर्शित किया गया। इसके बाद कक्षा प्रथम के विद्यार्थियों ने अपनी शानदार नृत्य प्रस्तुति से समारोह में उत्साह और उल्लास भर दिया। विभिन्न खेलों एवं गतिविधियों के विजेताओं की घोषणा कर उन्हें सम्मानित भी किया गया।

समारोह का प्रमुख आकर्षण कक्षा द्वितीय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नाट्य मंचन “ग्रैंडपेरेंट्स – द मैजिक ट्री ऑफ मेमोरीज” रहा। नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से दादा-दादी एवं नाना-नानी के निःस्वार्थ प्रेम, जीवन अनुभव, स्नेह, त्याग और परिवार को एक सूत्र में बांधे रखने में उनके अमूल्य योगदान को अत्यंत प्रभावशाली एवं संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया। बच्चों के अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. देवी राम जी ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में बच्चों के जीवन में पारिवारिक संस्कारों, बुजुर्गों के अनुभव और पीढ़ियों के बीच संवाद के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर दादा-दादी एवं नाना-नानी ने भी अपने अनुभव और विचार साझा करते हुए बच्चों को परिवार, संस्कार, प्रेम, सम्मान और रिश्तों के महत्व का संदेश दिया।

विद्यालय के चेयरमैन डॉ. पीयूष अग्रवाल, वाइस चेयरमैन शैलेंद्र गुप्ता, डायरेक्टर-प्रिंसिपल पुलोमा नंदी एवं उप-प्रधानाचार्य राज कुमार दास के मार्गदर्शन एवं देखरेख में समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंत में समन्वयक इंद्राणी मुखर्जी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। तत्पश्चात सभी ने सम्मानपूर्वक राष्ट्रीय गान में सहभागिता की।

विद्यालय प्रबंधन के अनुसार इस आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बच्चों को अपनी पारिवारिक जड़ों, भारतीय जीवन-मूल्यों, बड़ों के सम्मान, कृतज्ञता और संस्कारों से जोड़ना भी था। साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और गतिविधियों ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता, सामूहिकता और नेतृत्व क्षमता के विकास का अवसर प्रदान किया।

ग्रैंडपेरेंट्स डे का यह भव्य समारोह स्नेह, सम्मान, संस्कार और खूबसूरत स्मृतियों से सराबोर रहा। बच्चों और उनके दादा-दादी एवं नाना-नानी के बीच साझा किए गए भावुक एवं आनंदमय पलों ने विभिन्न पीढ़ियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत किया तथा यह आयोजन सभी के लिए एक अविस्मरणीय स्मृति बन गया।

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