NEWS PR डेस्क: पश्चिम चंपारण जिले के बैरिया बाजार स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना को लेकर बच्चों का गुस्सा फूट पड़ा। भोजन के निर्धारित मेनू का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए बच्चों ने विद्यालय परिसर में जमकर हंगामा किया। बच्चों ने भोजन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नाराजगी जताई।
अंडे की जगह केला और केले की जगह अंडा परोसने का आरोप
बच्चों का आरोप है कि विद्यालय में सरकार की ओर से निर्धारित मेनू के अनुसार मध्याह्न भोजन नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि जिस दिन मेनू के तहत अंडा दिए जाने का प्रावधान था, उस दिन अंडे की जगह बच्चों को केला परोसा गया वहीं, जिस दिन केला देने की व्यवस्था थी, उस दिन अंडा देकर भोजन की औपचारिकता पूरी की गई।
मेनू में कथित तौर पर हो रही इस गड़बड़ी से बच्चे नाराज हो गए। उन्होंने विद्यालय परिसर में विरोध जताते हुए भोजन व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की। देखते ही देखते स्कूल में हंगामे की स्थिति बन गई। बच्चों का कहना था कि मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य उन्हें पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

बच्चों के स्वास्थ्य और अधिकार से जुड़ा मामला बताया
मामले की जानकारी मिलने के बाद जन सुराज पार्टी के युवा प्रखंड अध्यक्ष, बैरिया, बुलेट कुमार यादव ने भी इस घटना पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि मध्याह्न भोजन में अनियमितता को सामान्य मामला नहीं माना जा सकता। यह सीधे तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और उनके अधिकारों से जुड़ा विषय है।
बुलेट कुमार यादव ने कहा कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सरकार द्वारा तय मेनू के अनुसार भोजन मिलना चाहिए। यदि भोजन वितरण में निर्धारित व्यवस्था का पालन नहीं किया जाता है, तो इससे बच्चों को मिलने वाले पोषण पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों की थाली में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
जन सुराज नेता ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल, विद्यालय में बच्चों के हंगामे के बाद मध्याह्न भोजन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जांच के बाद क्या कदम उठाए जाते हैं।
पश्चिम चंपारण से रिपोर्टर: मोहम्मद इम्तिआज़