NEWS PR डेस्क:पटना, बिहार संग्रहालय समिति एवं युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, बिहार सरकार के बिहार कौशल विकास मिशन के बीच आज 18 सितम्बर, 2026 को पर्यटन, संग्रहालय, कला, संस्कृति एवं विरासत के क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से दो वर्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
समझौता ज्ञापन पर बिहार कौशल विकास मिशन की तरफ से मिशन निदेशक मनीष शंकर तथा बिहार संग्रहालय की ओर से अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने हस्ताक्षर किए। विहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह और युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के सचिव कौशल किशोर की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह और कौशल किशोर ने कहा कि समझौते का मुख्य उद्देश्य बिहार की समृद्ध कला एवं सांस्कृ तिक विरासत को कौशल विकास से युवाओं को जोड़ना तथा उनके लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
इस समझौते के तहत बिहार संग्रहालय समिति को सरकारी प्रशिक्षण संस्था के रूप में पंजीकृत किया गया है। बिहार संग्रहालय परिसर में युवाओं के लिए विभिन्न विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को सैद्धांतिक जानकारी के साथ संग्रहालय में प्रत्यक्ष एवं व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होगा।
प्रारंभिक चरण में तीन विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे-
1- संग्रहालय एवं पर्यटन मार्गदर्शक प्रशिक्षण (Museum Guide-cum-Tour Guide)
इस प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को संग्रहालय एवं पर्यटन स्थलों पर आने वाले लोगों को जानकारी देने, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की विशेषताओं को समझाने, आगंतुकों की सहायता करने तथा पर्यटन गतिविधियों के समन्वय का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही आगंतुकों की सुरक्षा और बेहतर सेवा से संबंधित जानकारी भी दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवाओं के लिए पर्यटन क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध होंगे।
समझौता ज्ञापन के तहत संग्रहालय एवं पर्यटन मार्गदर्शक प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत 27 अक्टूबर 2026 से बिहार संग्रहालय में की जाएगी। इसके माध्यम से युवाओं को पर्यटन एवं संग्रहालय के क्षेत्र में रोजगार के लिए आवश्यक व्यावहारिक एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
2. कला की समझ एवं सराहना (Art Appreciation)
इस प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को कला, कला निर्माण की प्रक्रिया, दृश्य संस्कृति तथा भारत की विभिन्न कला परंपराओं की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य युवाओं में कला के प्रति समझ, रुचि और सराहना की भावना विकसित करना है।
3. लोक कला में रचनात्मक एवं डिजाइन प्रशिक्षण (Design in Folk Art)
इस प्रशिक्षण में पारंपरिक एवं लोक कला शैलियों की जानकारी के साथ उनके रचनात्मक और डिजाइनात्मक उपयोग पर ध्यान दिया जाएगा। इसके माध्यम से लोक कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण तथा उनके रचनात्मक उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
कला की समझ एवं सराहना तथा लोक कला में रचनात्मक एवं डिजाइन प्रशिक्षण के लिए बिहार संग्रहालय समिति द्वारा पाठ्यक्रम एवं विस्तृत जानकारी बिहार कौशल विकास मिशन को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके आधार पर आगे की आवश्यक प्रक्रिया एवं स्वीकृति की कार्रवाई की जाएगी।
इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विशेषता यह होगी कि इनका संचालन बिहार संग्रहालय परिसर में ही किया जाएगा। इससे प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को संग्रहालय की कला-वस्तुओं, प्रदर्शनियों, विरासत और आगंतुकों के साथ सीधे जुड़कर सीखने का अवसर मिलेगा।
बिहार संग्रहालय समिति द्वारा प्रशिक्षण के लिए आवश्यक सुविधाएं, संस्थागत सहयोग एवं योग्य प्रशिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी। निर्धारित योग्यता के आधार पर पारदर्शी प्रक्रिया से अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। महिला अभ्यर्थियों की भागीदारी को बढ़ावा देने तथा बुनियादी अंग्रेजी संचार क्षमता वाले अभ्यर्थियों को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बिहार कौशल विकास मिशन द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के पंजीकरण, प्रशिक्षण, मूल्यांकन एवं प्रमाणन में आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। निर्धारित नियमों और उपलब्ध निधि के अनुसार प्रशिक्षण की लागत के भुगतान में भी सहयोग किया जाएगा। अधिक से अधिक युवाओं तक कार्यक्रम की जानकारी पहुंचाने के लिए समाचार पत्रों, डिजिटल माध्यमों एवं सामाजिक माध्यमों के जरिए प्रचार-प्रसार में भी सहयोग किया जाएगा।
यह दो वर्षीय समझौता बिहार कौशल विकास मिशन और बिहार संग्रहालय समिति के बीच दीर्घकालिक सहयोग का आधार बनेगा। कार्यक्रमों के सुचारु संचालन, निगरानी एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दोनों संस्थाओं द्वारा नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
यह पहल बिहार के युवाओं को कला, संस्कृति, पर्यटन, संग्रहालय एवं विरासत से जोड़ते हुए रोजगारपरक कौशल प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी के कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।