गयाजी में खुले BHU और AMU की शाखाएं, कांग्रेस ने केंद्र सरकार से की बड़ी मांग

Rashmi Tiwari

गयाजी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) की शाखाएं खोलने की मांग तेज हो गई है। बिहार में उच्च शिक्षा के विस्तार और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से गयाजी में दोनों प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कैंपस स्थापित करने की मांग की है। नेताओं का मानना है कि पर्याप्त जमीन, बेहतर कनेक्टिविटी और पहले से मौजूद शैक्षणिक संस्थानों के कारण गयाजी इस पहल के लिए उपयुक्त स्थान हो सकता है।

इस मांग को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि और BHU-AMU शाखा खोलो संघर्ष समिति के संयोजक विजय कुमार मिट्ठू सहित कई कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से पहल करने की अपील की है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बिहार में दोनों विश्वविद्यालयों की शाखाएं स्थापित करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी हाल ही में कैमूर की एक सभा में बिहार में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की दो शाखाएं खोलने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की बात कही थी। अब कांग्रेस नेताओं ने गयाजी को इन कैंपसों के लिए प्राथमिकता देने की मांग की है।
जमीन की उपलब्धता को बताया अहम आधार
नेताओं ने दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के आसपास दरियापुर, पंचानपुर और टिकारी के समीप रक्षा मंत्रालय की लगभग 600 एकड़ जमीन का उल्लेख किया। इसके अलावा मगध विश्वविद्यालय की करीब 525 एकड़ जमीन में से आईआईएम को भूमि दिए जाने के बाद बची जमीन पर भी संभावनाएं तलाशने की बात कही। हालांकि, इन जमीनों की वास्तविक उपलब्धता और उपयोगिता का आकलन संबंधित विभागों की जांच के बाद ही संभव होगा।
उच्च शिक्षा और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, गयाजी में दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, आईआईएम, ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, डीआरडीओ और मगध विश्वविद्यालय जैसे संस्थान पहले से मौजूद हैं। ऐसे में BHU और AMU की शाखाएं खुलने से उच्च शिक्षा, शोध, अकादमिक गतिविधियों और स्थानीय रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।
कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से मांग की है कि गयाजी में दोनों विश्वविद्यालयों के कैंपस स्थापित करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि बिहार के विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई के अधिक अवसर मिल सकें।

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