पटना में केयर इकोनॉमी पर कार्यशाला, जीविका दीदियों के लिए रोजगार के नए अवसर

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क :पटना, बिहार में देखभाल आधारित अर्थव्यवस्था (केयर इकोनॉमी) के विकास, रोजगार सृजन और महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आज पटना स्थित लेमन ट्री होटल में “Building Bihar’s Care Economy: Services, Livelihoods and Pathways to Scale” विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसके साथ ही दिन के द्वितीय सत्र में नवाचार आधारित उद्यमों पर परामर्श कार्यशाला का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में जीविका, यूनिसेफ बिहार, स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, उद्यमियों तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य देखभाल सेवाओं को सामाजिक कल्याण, महिला सशक्तीकरण और रोजगार के अवसरों से जोड़ते हुए इनके विस्तार के व्यावहारिक रास्तों पर चर्चा करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ राजस्व परिषद बिहार की अध्यक्ष-सह-सदस्य हरजोत कौर बम्हरा, ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एच. आर. श्रीनिवासन, जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, हिमांशु शर्मा, अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जीविका, अनन्या सिंह तथा यूनिसेफ बिहार की फील्ड ऑफिस प्रमुख (प्रभारी) मोना सिन्हा, द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

कार्यक्रम के प्रारंभिक सत्र में जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, हिमांशु शर्मा ने कार्यशाला के उद्देश्य और अपेक्षित परिणामों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि देश में केयर इकॉनोमी क्षेत्र जीविकोपार्जन संवर्धन हेतु एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभर रहा है। जीविका स्वयं सहायता समूहों की दीदियों को प्रशिक्षण और उपयुक्त संसाधन मुहैया कराकर इस क्षेत्र में नए अवसर प्रदान किया जा सकता है।

यूनिसेफ बिहार की चीफ ऑफ फील्ड ऑफिसर (प्रभारी) मोना सिन्हा ने अपने उद्घाटन संबोधन में केयर इकोनॉमी को सामाजिक नीति, लैंगिक समानता और रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण विषय के रूप में रेखांकित किया।

वहीं, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव एच.आर. श्रीनिवास ने ग्रामीण आजीविका, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और देखभाल सेवाओं के विस्तार की संभावनाओं पर अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि केयर इकोनॉमी में जीविका दीदियों की भूमिका केवल अनौपचारिक देखभाल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। हमें उन्हें चयन कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार औपचारिक प्रमाणन (Certifications), भाषा कौशल (स्थानीय व विदेशी भाषाएं) और पेशेवर रूप से क्षमता निर्माण (Capacity Building) करने की आवश्यकता होगी तभी दीदियों की वास्तविक आय (Real Income) में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकेंगे।

बिहार सरकार की राजस्व पर्षद की अध्यक्ष-सह-सदस्य हरजोत कौर बम्हरा, आईएएस ने देखभाल संबंधी आवश्यकताओं और सामाजिक कल्याण के दृष्टिकोण पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जीविका के माध्यम से किशोरियों के स्वयं सहायता समूह (Adolescent Groups) का गठन कर शुरुआती चरण से ही उन्हें भाषा प्रशिक्षण, शिक्षा और व्यावसायिक कौशल से जोड़कर हम देखभाल क्षेत्र में एक नई और दक्ष पीढ़ी तैयार कर सकते हैं। यह ग्रामीण युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार का नया मार्ग प्रशस्त करेगा।

उद्घाटन सत्र का समापन जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, अनन्या सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि केयर इकॉनोमी पहल से जहाँ एक ओर जीविका से जुड़ी महिलाओं को रोजगार मिलेगा वहीं जरूरतमंदों को उनके देखरेख हेतु प्रशिक्षित सेवा प्रदाता मिलेगें

कार्यशाला के तकनीकी सत्र में केयर इकोनॉमी के ढांचे को व्यावहारिक कार्ययोजना में बदलने तथा सेवाओं को बड़े स्तर पर प्रभावी ढंग से संचालित करने के तरीकों पर चर्चा हुई। इसके आरंभ जीविका के अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, अनन्या सिंह ने केयर इकोनॉमी के पांच मुख्य क्रियान्वयन पथ (Operational Pathways) प्रस्तुत किए।

परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार सुश्री कविता नारायण ने बड़े स्तर पर देखभाल सेवाओं के संचालन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

तत्पश्चात, एम्स पटना में एनेस्थीसिया एवं पैलिएटिव केयर विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. उमेश बधानी ने घर-आधारित पैलिएटिव केयर, देखभालकर्ताओं के प्रशिक्षण और सामुदायिक सहयोग की भूमिका पर प्रकाश डाला।

पैलियम इंडिया के पद्मश्री डॉ. एम.आर. राजगोपाल ने सामुदायिक देखभाल के अनुभवों के माध्यम से इस क्षेत्र में मानवीय दृष्टिकोण, प्रशिक्षित कार्यबल और स्थानीय भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।

अवसर आधारित आजीविका और रोजगार सृजन के साथ देखभाल सेवाओं को जोड़ने पर भी विशेष चर्चा हुई। अवसर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, अवसर, नवनीत सिंह ने देखभाल सेवाओं को आजीविका के अवसरों में बदलने की संभावनाओं पर अपना अनुभव साझा किया।

Learnig from care Services विषय पर जीविका की कार्यक्रम समन्वयक–गवर्नेंस एवं नॉलेज मैनेजमेंट, महुआ रॉय चौधरी के संचालन में आयोजित परिचर्चा में वन बिलियन लाइव्स फाउंडेशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी बिजित रॉय, मोबाइल क्रेचेज की सोनल सिन्हा, ट्रस्टबी के संस्थापक शुभम कुमार तथा जीविका के स्वास्थ्य एवं पोषण विषय के राज्य परियोजना प्रबंधक अप्पोलेनारियस पुर्ती ने भाग लिया। परिचर्चा में देखभाल सेवाओं के व्यावहारिक मॉडल, कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और सेवाओं को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

दिन के दूसरे सत्र में आयोजित नवाचार आधारित उद्यमों की परामर्श कार्यशाला में जीविका के राज्य एवं जिला स्तर के अधिकारियों ने अपने अनुभवों और पहलों को प्रस्तुत किया। इस सत्र का संचालन डेलॉइट के एसोसिएट डायरेक्टर मौनिक लाहिड़ी ने किया।

इसके बाद “कचरे से संपदा: महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण ऊर्जा तंत्र के रूप में बायोगैस” विषय पर परिचर्चा हुई। इसमें एकेएफ की मुख्य कार्यपालक अधिकारी टिन्नी साहनी, सिस्टम बायो के क्षेत्रीय प्रबंधक ऋषभ, सस्टेन प्लस एनर्जी फाउंडेशन के रिलेशनशिप मैनेजर प्रशांत कुमार सिंह, एग्रोविन एग्री सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक उमा शंकर कुमार तथा बरौनी डेयरी के उप प्रबंधक कुमार अंबुज ने भाग लिया। परिचर्चा में बायोगैस, जैविक अपशिष्ट के उपयोग और ग्रामीण ऊर्जा आधारित उद्यमों की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम के अंतिम तकनीकी सत्र में “सूर्य के प्रकाश से सतत् आय: महिला-नेतृत्व वाले सौर सिंचाई उद्यमों का निर्माण” विषय पर परिचर्चा आयोजित हुई। इसमें इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (आईडब्ल्यूएमआई), भारत के उप देशीय प्रतिनिधि शिल्प वर्मा, आगा खान रूरल सपोर्ट प्रोग्राम, इंडिया के क्षेत्रीय प्रबंधक जय प्रकाश सिंह, सस्टेन प्लस एनर्जी फाउंडेशन के कार्यक्रम प्रबंधक प्रशांत कुमार सिंह तथा सिस्टम बायो के क्षेत्रीय प्रबंधक ऋषभ ने भाग लिया। इस सत्र में सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई, ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व में उद्यम विकास तथा कृषि और ऊर्जा के बीच समन्वय की संभावनाओं पर विचार किया गया।

कार्यशाला ने बिहार में देखभाल सेवाओं को आजीविका से जोड़ने, सामुदायिक सहयोग को मजबूत करने और महिला-नेतृत्व वाले नवाचार आधारित उद्यमों के विकास पर बहुआयामी संवाद का अवसर प्रदान किया। ऐसे प्रयास ग्रामीण महिलाओं के लिए नए कौशल और रोजगार के अवसर विकसित करने तथा स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने की दिशा में उपयोगी हो सकते हैं। कार्यक्रम में प्रस्तुत अनुभवों और विचारों से देखभाल सेवाओं, ग्रामीण ऊर्जा तथा सौर सिंचाई जैसे क्षेत्रों में संभावित साझेदारियों से विस्तार के नए रास्तों की पहचान की जा सकती है।

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