NEWS PR डेस्क :हनुमान जयंती के पावन अवसर पर राजधानी पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर में भक्ति और श्रद्धा का विशेष आयोजन होने जा रहा है। मंदिर परिसर में 30 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को सुबह 9 बजे कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय श्रीरामचरितमानस नवाह पाठ का शुभारंभ किया जाएगा। इस धार्मिक अनुष्ठान के यजमान श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल होंगे।
मिथिला की नौ सदस्यीय मंडली करेगी रामचरितमानस का पाठ
महावीर मंदिर के ऊपरी तल पर स्थित स्थायी मंडप में इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। श्रीरामचरितमानस नवाह पाठ के लिए मधुबनी (मिथिला) से नौ सदस्यीय मंडली पहुंचेगी, जो लगातार नौ दिनों तक सामूहिक रूप से पाठ करेगी। मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस आयोजन की पूर्णाहुति 7 नवंबर को हनुमान जयंती के दिन होगी। इस अवसर पर मंदिर के स्थायी मंडप को विशेष रूप से सजाया जाएगा। पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
पहले आचार्य किशोर कुणाल निभाते थे पूजा का दायित्व
इस आयोजन की एक विशेष बात यह भी है कि पूर्व में पद्मश्री आचार्य किशोर कुणाल स्वयं यजमान के रूप में पूजा पर बैठते थे। अब उनके स्थान पर यह दायित्व महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल निभाएंगे। पूजा संपन्न कराने के लिए एक पुरोहित को भी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
श्रद्धालु भी कर सकेंगे सामूहिक रामचरितमानस पाठ
महावीर मंदिर प्रशासन ने इस आयोजन में स्थानीय श्रद्धालुओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की है। श्रद्धालु अपने आसन और श्रीरामचरितमानस ग्रंथ के साथ सुविधानुसार नवाह पाठ में शामिल हो सकेंगे।
मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के बैठने और पाठ करने की समुचित व्यवस्था की गई है। इसके अलावा मंदिर की ओर से भी आसन और श्रीरामचरितमानस की पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि अधिक से अधिक भक्त इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हो सकें।
भक्ति, शक्ति और समर्पण का संदेश देगा नवाह पाठ
भगवान हनुमान को भक्ति, शक्ति, साहस, सेवा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। हनुमान जयंती के अवसर पर श्रीरामचरितमानस का नवाह पाठ विशेष धार्मिक महत्त्व रखता है। भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादाओं का स्मरण भक्तों को सदाचार, निष्ठा और सेवा भाव की प्रेरणा देता है।
महावीर मंदिर में नौ दिनों तक चलने वाले इस आयोजन से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सामूहिक रूप से प्रभु श्रीराम के आदर्शों का स्मरण करने और पवनपुत्र हनुमान के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करने का अवसर प्रदान करना है।