खाते से उड़ गए इतने पैसे, बैंक ने भी खड़े किए हाथ, फिर हुआ ये…

Patna Desk
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NEWSPR DESK- देश में इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते चलने के कारण साइबर क्राइम और बैंक फ्रॉड के मामले बढ़े हैं. लाखों लोग इस धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं. इस मामले में मुंबई हाईकोर्ट ने बैंक ग्राहकों के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया है. उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि जब भी कोई अनाधिकृत लेनदेन, किसी थर्ड पार्टी ब्रीच के कारण होता है तो इसमें बैंक या ग्राहक की नहीं, बल्कि तंत्र में कहीं कमी होती है, इसलिए ऐसे मामले में ग्राहक की कोई जिम्मेदारी नहीं होती. न्यायालय ने बैंक ऑफ बड़ौदा को एक कंपनी के बैंक खाते से धोखाधड़ी से निकाले गए 76 लाख रुपये वापस करने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ जयप्रकाश कुलकर्णी और फार्मा सर्च आयुर्वेद प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इसमें बैंकिंग लोकपाल द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें बैंक ऑफ बड़ौदा को साइबर धोखाधड़ी के माध्यम से कथित रूप से उनके खाते से निकाले गए 76 लाख रुपये की राशि वापस करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया गया था.

उच्च न्यायालय की पीठ ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी जुलाई, 2017 के एक परिपत्र का हवाला देते हुए कहा कि बैंक ऑफ बड़ौदा के पास उपभोक्ता संरक्षण नीति (अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन) नामक एक नीति है जो इसी बात को दोहराती है

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