विद्यार्थी परिषद के दर्जनों कार्यकर्ताओ ने कि विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारीबाजी,3 गिरफ्तार

Patna Desk
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भागलपुर :अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के द्वारा तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति पर लगातार प्रमाणित हो रहे भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ को लेकर लगातार दूसरे दिन भी विश्वविद्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया। मंगलवार को विद्यार्थी परिषद के दर्जनों कार्यकर्ता विश्वविद्यालय पहुंचे और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारीबाजी करने लगे। इसी दौरान मौके पर पहुंची विश्वविद्यालय पुलिस ने तीन विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है दिन भर चले प्रदर्शन के बाद विद्यार्थी परिषद ने देर शाम विद्यार्थी परिषद की गिरफ्तारी के विरोध में कुलपति का पुतला दहन किया आपको बता दे की कई मुद्दों को लेकर विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने कुलपति से स्थिति की मांग कर रहे थे। सोमवार को पोस्टर के जरिए विद्यार्थी परिषद ने गली गली में शोर है, TMBU के कुलपति चोर है चोर कुलपति इस्तीफा दो एवं अन्य नारा को विश्वविद्यालय के दीवार पर विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने चिपकाए थे पूर्व से निर्धारित बिहार सरकार के सात निश्चय योजना के तहत एससी एसटी वर्गों के छात्र एवं सभी वर्गों की छात्रों का निशुल्क नामांकन प्रस्तावित है एवं बिहार के सभी विश्वविद्यालय में इसे लागू भी किया गया लेकिन तिलकामांझी विश्वविद्यालय में पिछले सत्र में विद्यार्थी परिषद के आंदोलन को देखते हुए इसे लागू किया गया लेकिन फिर अगले सत्र से इसे हटा दिया गया।

विद्यार्थी परिषद बोले –

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प्रदेश सह मंत्री हैप्पी आनंद एवं जिला संयोजक रोहित राज ने कहा कि तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति पर लगातार वित्तीय अनियमित के आरोप सामने आ रहे हैं अब तो मुंगेर विश्वविद्यालय मैं प्रतिकूलपति रहते हुए जो आईफोन और लैपटॉप की सुविधा सरकारी कर्मचारी होने के नाते उन्हें उपलब्ध कराया गया था वह तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति बनने के बाद लैपटॉप और फोन को अपने व्यक्तिगत इस्तेमाल के रख लिया यह पूर्ण रूप से चोरी ही नहीं यह खुले आम डकैती का मामला बनाया जा सकता है आज कुलपति के आवास से लैपटॉप और आईफोन प्राप्त हुआ है जो मुंगेर विश्वविद्यालय का ऐसे कुलपति छात्रों के लिए क्या सीख देना चाहते हैं विश्वविद्यालय में कुलपति आने के बाद वह अपने आप को संविधान निर्माता से भी ऊपर समझने की भूल कर रहे हैं कई पदों का सीजन विश्वविद्यालय में आने के बाद उन्होंने किया है जो गैर संवैधानिक है जैसे मीटिंग ऑफिसर, PRO एवं अन्य कई ऐसे पदों का सीजन किया है जो संवैधानिक है ही नहीं इस पर कुलपति को जवाब देना पड़ेगा अपने स्वास्थ्य की देखभाल के लिए अपने परिवार के लोगों की ही नियुक्ति क्यों इस पर भी कुलपति को जवाब देना पड़ेगा और विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने आज से प्राण लिया है जब तक कुलपति इन सभी बातों का जबाब देना पड़ेगा।

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