NEWS PR डेस्क : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दो दशक से अधिक के शासनकाल में महिला सशक्तिकरण और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिले हैं। सरकारी योजनाओं और पहलों के माध्यम से महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है, वहीं विकास कार्यों ने राज्य की प्रगति को नई गति और दिशा प्रदान की है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दो दशक से अधिक लंबे कार्यकाल में कई अहम पहलें देखने को मिलीं, जिनमें महिला सशक्तिकरण और आधारभूत ढांचे के विकास को विशेष महत्व दिया गया। उनके नेतृत्व में ऐसी नीतियां लागू की गईं, जिन्होंने राज्य में महिलाओं की भागीदारी और अवसरों को नई दिशा दी।
साल 2006 में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना गया। बाद में यही व्यवस्था नगर निकाय चुनावों में भी लागू की गई। इस पहल के परिणामस्वरूप गांव-गांव में महिला मुखिया और वार्ड सदस्य चुनी जाने लगीं। शुरुआती दौर में “मुखिया पति” जैसे तंज सुनने को मिले, लेकिन समय के साथ महिलाओं ने स्वयं नेतृत्व की कमान संभाल ली और स्थानीय शासन में सक्रिय भूमिका निभाने लगीं।
लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं शुरू की गईं। मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना और पोशाक योजना के तहत छात्राओं को साइकिल खरीदने के लिए सीधे उनके बैंक खातों में राशि दी जाने लगी। इन योजनाओं का असर यह हुआ कि कुछ ही वर्षों में मैट्रिक परीक्षा में शामिल होने वाले लड़कों और लड़कियों की संख्या लगभग बराबर हो गई। इसके अलावा छात्राओं के लिए विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्ति योजनाएं भी शुरू की गईं, जिससे उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिली।
महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए जीविका कार्यक्रम को भी व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया गया। विश्व बैंक की सहायता से शुरू हुई इस योजना के अंतर्गत आज राज्य में करीब 10 लाख जीविका समूह सक्रिय हैं, जिनसे एक करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अनेक महिलाओं ने छोटे-मोटे व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है।
सरकारी नौकरियों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। राज्य पुलिस बल में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया, जिसके चलते बिहार देश में सबसे अधिक महिला पुलिसकर्मियों वाला राज्य बन गया। इसके साथ ही प्रारंभिक शिक्षकों की नियुक्ति में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था भी की गई, जिससे शिक्षा क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ी।