सीतामढ़ी में सीता मंदिर शिलान्यास की भव्य तैयारी, स्वाति मिश्रा का नया भजन पहली बार होगा प्रस्तुत

Jyoti Sinha
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बिहार के सीतामढ़ी जिले में 8 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में माता सीता के भव्य मंदिर के शिलान्यास और भूमि पूजन कार्यक्रम की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं। पुनौरा धाम में बनने वाले इस मंदिर को लेकर राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन मिलकर व्यापक स्तर पर तैयारी कर रहे हैं।

इस ऐतिहासिक अवसर पर भक्ति संगीत की दुनिया में अपनी खास पहचान बना चुकीं बिहार की बेटी स्वाति मिश्रा एक बार फिर चर्चा में हैं। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के उद्घाटन समारोह के दौरान उनके द्वारा गाया गया भजन “राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी” देशभर में अत्यधिक सराहा गया था। अब स्वाति पुनः एक आध्यात्मिक यात्रा पर निकल रही हैं और पुनौरा धाम में होने वाले इस विशेष समारोह में माता सीता को समर्पित एक नया भक्ति गीत प्रस्तुत करेंगी।

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स्वाति ने जानकारी दी कि यह नया गीत फिलहाल मुंबई में रिकॉर्ड हो रहा है और इसका पहला प्रदर्शन 8 अगस्त को मंदिर शिलान्यास समारोह के दौरान होगा। उन्होंने इस अवसर को अपने लिए सौभाग्य का पल बताया और यह भी साझा किया कि उनके अन्य कई भक्ति प्रोजेक्ट्स भी जल्द आने वाले हैं। “पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएंगे” जैसे प्रसिद्ध भजन का दूसरा भाग भी तैयार किया जा रहा है।

स्वाति मिश्रा की संगीत यात्रा अब राम भक्ति से आगे बढ़कर सीता भक्ति तक पहुंच गई है और वह आज की पीढ़ी की एक प्रमुख आध्यात्मिक गायिका बन चुकी हैं।

वहीं, पुनौरा धाम में बनने वाले मंदिर को लेकर सरकार ने भी बड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंदिर निर्माण और क्षेत्रीय विकास के लिए 882.87 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इससे पहले भी नवंबर 2024 में क्षेत्र में आधारभूत विकास और पर्यटक सुविधाओं के लिए 120 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई थी, जिसके अंतर्गत 50 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई।

मंदिर निर्माण की ज़िम्मेदारी पुनौरा धाम मंदिर न्यास समिति को सौंपी गई है, जिसके अध्यक्ष मुख्य सचिव बनाए गए हैं। इस ट्रस्ट में राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों के सचिव, ज़िला अधिकारी, डीडीसी और मठ के महंत सहित कुल 9 सदस्य शामिल हैं। विकास आयुक्त को उपाध्यक्ष और डीडीसी को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

यह परियोजना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे एक बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित करने की दिशा में अहम क़दम माना जा रहा है।

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