मुजफ्फरपुर में 7 करोड़ के गबन मामले में बेबी कुमारी दोषी करार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया

Rashmi Tiwari

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर में करीब सात करोड़ रुपये के सरकारी राशि गबन से जुड़े मामले में बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की आरोपी तत्कालीन महिला सिपाही बेबी कुमारी को विशेष निगरानी अदालत ने दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषसिद्धि के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। अब इस मामले में सजा की अवधि को लेकर 26 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होगी।जानकारी के अनुसार, 5 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायालय निगरानी, मुजफ्फरपुर के विशेष न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर ने यह फैसला सुनाया। बेबी कुमारी मुजफ्फरपुर जिला बल में महिला सिपाही-824 के पद पर तैनात थीं। उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 471, 409, 420 और 120बी के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(ई) एवं 13(2) के तहत दोषी पाया गया है।सात करोड़ रुपये के गबन से जुड़ा है मामलाइस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। मुजफ्फरपुर थाना कांड संख्या 401/10 में पुलिस कार्यालय के तत्कालीन लेखापाल सुशील कुमार चौधरी सहित अन्य लोगों पर षड्यंत्र के तहत सरकारी राशि में भारी वित्तीय अनियमितता और सात करोड़ रुपये से अधिक के गबन का आरोप लगाया गया था।स्थानीय पुलिस की जांच में सामने आया कि वर्ष 2006 से सितंबर 2010 के बीच पुलिसकर्मियों के वेतन, यात्रा भत्ता (टीए) और अन्य मदों की सरकारी राशि को कथित तौर पर अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। इसी क्रम में महिला सिपाही बेबी कुमारी के बैंक खाते में भी बड़ी रकम जमा कराई गई थी। जांच के दौरान आरोपियों के आवास से नकदी, आभूषण और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए थे।35 लाख से अधिक की मिली थी अनुपातहीन संपत्तिइसके बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बेबी कुमारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप की जांच की। जांच में 35 लाख 42 हजार 955 रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का मामला सामने आया, जिसके आधार पर निगरानी थाना कांड संख्या 27/2012 दर्ज किया गया।इस मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता अश्विनी कुमार, वरीय पुलिस उपाधीक्षक ने समय पर आरोप पत्र दाखिल किया। वहीं, बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक कृष्ण देव साह ने अदालत में प्रभावी पैरवी की।अब सभी की नजरें 26 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जब अदालत दोषी महिला सिपाही की सजा पर फैसला सुनाएगी।

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