बिहार के 25 हजार ममता कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार देगी 6.60 करोड़ रुपये

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 14 जून। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहीं बिहार की ममता कार्यकर्ताओं के लिए राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 6.60 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया है। जरूरत पड़ने पर अंतिम पूरक बजट में भी अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई जा सकती है। इस निर्णय से राज्यभर में कार्यरत लगभग 25 हजार ममता कार्यकर्ताओं को लाभ मिलेगा।

स्वास्थ्य विभाग के तहत कार्यरत ममता कार्यकर्ता सरकारी अस्पतालों में प्रसव सेवाओं और जच्चा-बच्चा देखभाल में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। वर्तमान में उन्हें प्रत्येक संस्थागत प्रसव पर 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह राशि उनके कार्य के आधार पर भुगतान की जाती है।

राज्य के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों, सदर अस्पतालों, अनुमंडल अस्पतालों, रेफरल अस्पतालों के अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ममता कार्यकर्ता सेवाएं दे रही हैं। इनके प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिला है और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में भी सुधार दर्ज किया गया है।

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2008 में शुरू हुई थी योजना

ममता योजना की शुरुआत वर्ष 2008 में की गई थी। उस समय ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 100 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती थी। बाद में वर्ष 2016-17 से 2024-25 तक यह राशि 300 रुपये रही। इसके बाद 6 अगस्त 2025 को स्वास्थ्य विभाग ने संकल्प जारी कर इसे दोगुना करते हुए 600 रुपये प्रति प्रसव कर दिया। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि प्रोत्साहन राशि में वृद्धि से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है और स्वास्थ्य सेवाओं में उनकी भागीदारी और प्रभावशीलता मजबूत हुई है।

ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम

यह योजना सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन भी बनी है। राज्य के हजारों परिवारों की महिलाएं ममता कार्यकर्ता के रूप में जुड़कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं और अपने समुदाय में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने का काम भी कर रही हैं।

ममता कार्यकर्ताओं की प्रमुख जिम्मेदारियां

  1. संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना:
    गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के लिए प्रेरित करना और प्रसव के दौरान सहयोग प्रदान करना।
  2. जच्चा-बच्चा की देखभाल:
    प्रसव के बाद शुरुआती 48 घंटे तक मां और नवजात की देखभाल, पोषण, स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी देना।
  3. स्वास्थ्य जागरूकता अभियान:
    ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व, स्तनपान, टीकाकरण और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति जागरूक करना।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ममता कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका के कारण बिहार में संस्थागत प्रसव की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। यही वजह है कि सरकार उनके प्रोत्साहन और भुगतान व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर दे रही है। इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

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