बिहार सरकार ने बढ़ाई जमीन की रिकवरी, लैंड बैंक निर्माण को बनाया शीर्ष प्राथमिकता

Neha Nanhe
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NEWS PR डेस्क : बिहार सरकार ने अवैध कब्जे वाली सरकारी जमीन को खाली कराने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। उच्चतम न्यायालय की हालिया टिप्पणी के बाद कार्रवाई और सख्त कर दी गई है। सरकार ने शून्य सहिष्णुता नीति लागू की है, जिसके तहत वादों के जरिए जमीनों की रिकवरी सुनिश्चित की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य लैंड बैंक का निर्माण करना है, जिससे औद्योगिकीकरण और जनकल्याण योजनाओं के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध हो सके। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इन जमीनों को राज्य की कीमती संपत्ति करार दिया है।

बिहार सरकार ने राज्य की सरकारी जमीन की सुरक्षा और संरक्षण के लिए व्यापक प्रशासनिक अभियान शुरू किया है। कैडेस्ट्रल सर्वे में दर्ज उन भूमि क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिन पर वैध बंदोबस्ती नहीं हुई है और जो निजी कब्जे में हैं। सभी जिलाधिकारियों को इन जमीनों को मुक्त कराने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। उच्चतम न्यायालय की हालिया टिप्पणी के बाद कार्रवाई और भी तेज कर दी गई है, और अब अवैध कब्जे के मामलों में शून्य सहिष्णुता नीति लागू की गई है।

एसएलपी (सी) संख्या 4337/2025, विनोद गांधी बनाम डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, मदुरई मामले में 22 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों की लापरवाही पर सख्त टिप्पणी की थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य के हित किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होने चाहिए। इसके बाद, मुख्य सचिव के निर्देश पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जिलाधिकारियों को त्वरित और कठोर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

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बिहार सरकार ने सरकारी जमीन की रिकवरी के लिए सख्त कदम उठाना शुरू कर दिया है। प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अवैध कब्जे वाली भूमि की पहचान की जाए और विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत वाद दायर कर उन्हें वापस लिया जाए। प्राथमिकता के आधार पर अवैध कब्जा हटाकर सरकारी जमीन को मुक्त कराने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही जिला प्रशासन को नियमित निगरानी और प्रगति रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है।

मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकारी भूमि राज्य की अमूल्य संपत्ति है और किसी भी तरह का अवैध कब्जा न स्वीकार्य है और न सहनीय। अधिकारियों की लापरवाही से राज्यहित प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा, और हर स्तर पर प्रशासन जवाबदेह होगा।

सरकार की प्राथमिकता अंचलवार सरकारी जमीन को सुरक्षित कर लैंड बैंक का निर्माण करना है। इससे औद्योगीकरण, आधारभूत संरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध होगी। यह पहल निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन में भी सहायक मानी जा रही है।

पिछले दो महीनों में भूमि सुरक्षा को लेकर कई परिपत्र जारी किए जा चुके हैं। अब जिला स्तर पर सख्त क्रियान्वयन शुरू हो गया है। स्पष्ट संकेत यह है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों में प्रशासन सक्रिय और कठोर रुख अपनाएगा, ताकि राज्य के विकास परियोजनाओं में कोई बाधा न आए।

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