बिहार: पुनारख-किऊल रेलखंड को मिली नई रफ्तार, तीसरी-चौथी लाइन को केंद्र की मंजूरी

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना। बिहार के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण रेलखंड पुनारख-किऊल पर अब ट्रेनों की रफ्तार और संख्या दोनों बढ़ेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने इस सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर करीब 2,668 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसकी लंबाई लगभग 49.57 किलोमीटर होगी।

यह नई लाइन पटना और लखीसराय जिलों से होकर गुजरेगी और कोलकाता-प्रयागराज मुख्य रेल कॉरिडोर को और मजबूत बनाएगी, जिसे पूर्वी भारत की आर्थिक लाइफ लाइन माना जाता है।

दो लाइनों की भीड़ से मिलेगी राहत

फिलहाल इस सेक्शन पर केवल दो रेल लाइनें हैं, जिस कारण ट्रेनों की क्रॉसिंग, सिग्नलिंग और भारी ट्रैफिक के चलते अक्सर देरी होती है। तीसरी और चौथी लाइन बनने से इस मार्ग की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और परिचालन अधिक सुचारू हो सकेगा।

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रेलवे अधिकारियों के अनुसार, नई लाइनों के बाद पटना-किऊल-झाझा सेक्शन पर ट्रेनों की आवाजाही कहीं अधिक आसान हो जाएगी।

उद्योगों और माल ढुलाई को मिलेगा फायदा

पुनारख-किऊल क्षेत्र में एनटीपीसी की बाढ़ और बरौनी इकाइयों के अलावा सीमेंट, पावर और अन्य बड़े उद्योग सक्रिय हैं। इसके साथ ही फतुहा, मोकामा, बख्तियारपुर, बरहिया और लखीसराय में ऑटोमोबाइल, मार्बल, स्टोन क्रशिंग, फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल उद्योग तेजी से बढ़ रहे हैं।

नई लाइनों के निर्माण से मालगाड़ियों की संख्या बढ़ेगी, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और कोयला, सीमेंट, स्टील, उर्वरक और अनाज जैसी वस्तुओं की ढुलाई अधिक तेज और सस्ती हो सकेगी।

यात्रियों को भी होगा सीधा लाभ

इस परियोजना का फायदा सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा। यात्रियों के लिए भी राहत की खबर है। अतिरिक्त लाइनों से पैसेंजर ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, भीड़ कम होगी और यात्रा समय में कटौती होगी। खासकर पटना से झाझा की यात्रा अधिक आरामदायक और समयबद्ध हो सकेगी।

2030-31 तक पूरा होने का लक्ष्य

पुनारख-किऊल परियोजना को चरणबद्ध तरीके से 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना लगभग 17 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन से झाझा तक तीसरी-चौथी लाइन परियोजना का अहम हिस्सा है।

पूरे कॉरिडोर को कई छोटे खंडों में बांटकर निर्माण किया जा रहा है, जिनमें दानापुर-फतुहा, फतुहा-बख्तियारपुर, बख्तियारपुर–पुनारख और पुनारख-किऊल जैसे सेक्शन शामिल हैं।

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