NEWS PR डेस्क: बिहार सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सात निश्चय-3 के तहत “सुलभ स्वास्थ्य, सुरक्षित जीवन” योजना के अंतर्गत राज्य के 36 जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और 534 प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने सभी जिलों को निर्देश जारी किया है। सरकार का उद्देश्य लोगों को गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों और निजी अस्पतालों पर निर्भरता से राहत दिलाना है।
नई योजना के तहत जिला और प्रखंड स्तर के अस्पतालों में हार्मोन संबंधी रोग, तंत्रिका तंत्र की बीमारी, हृदय रोग, मूत्र रोग और किडनी रोग जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके जरिए मरीजों को अपने जिले में ही बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से जिलों को दो अलग-अलग प्रारूप भेजे गए हैं। प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए भवन, बेड, चिकित्सकों की उपलब्धता, उपकरण, जांच सुविधाएं और जनसंख्या कवरेज जैसी जानकारियां मांगी गई हैं। साथ ही एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी, ऑक्सीजन, एंबुलेंस और दवा भंडारण की स्थिति का ब्योरा देना भी अनिवार्य किया गया है।
वहीं जिला अस्पतालों के लिए सुपर स्पेशियलिटी स्तर की सुविधाओं का पूरा विवरण मांगा गया है। इसमें मेडिसिन, सर्जरी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, शिशु रोग, हड्डी रोग, नेत्र रोग, ईएनटी, हृदय रोग और नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञों की उपलब्धता की जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा ICU, NICU, PICU, ब्लड बैंक, ट्रॉमा सेंटर, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और आधुनिक जांच मशीनों की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा।

सरकार की यह पहल वर्ष 2025-30 की विकासात्मक और लोक कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत की जा रही है। योजना का मकसद राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को आधुनिक बनाना और आम लोगों को उनके जिले में ही गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है।