ब्लूबेरी से बदलेगी किसानों की किस्मत, सबौर में नई पहल

Foreign fruits, indigenous farms, farmers' income will increase

Amit Singh

बिहार में खेती अब पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रही। भागलपुर के सबौर से एक नई पहल सामने आई है, जहां अब विदेशी फल ब्लूबेरी की खेती शुरू की गई है।भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में आधुनिक कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। यहां पहली बार ब्लूबेरी की खेती की शुरुआत की गई है, जो अब तक अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में ही प्रचलित थी।

उच्च मूल्य वाली फसलों पर भी फोकस
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के अनुसार, किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से अब पारंपरिक फसलों( धान, मक्का और गेहूं) के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फसलों पर भी फोकस किया जा रहा है। इसी सोच के तहत ब्लूबेरी को ट्रायल बेसिस पर उगाया जा रहा है। वहीं कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रीति सिंह बताती हैं कि ब्लूबेरी न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले समय में बिहार के किसान भी इस हाई-वैल्यू क्रॉप से अच्छा मुनाफा कमा सकेंगे।नई सोच, नई खेती और बेहतर कमाई—सबौर से शुरू हुई यह पहल बिहार के कृषि क्षेत्र में बदलाव की बड़ी उम्मीद बनकर उभर रही है।

भागलपुर से शयामानंद सिंह की रिपोर्ट

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