कला संस्कृति विकास योजना से देशभर में कलाकारों को मिल रहा है संबल

Amit Singh
- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

NEWS PR डेस्क: केंद्र सरकार देश में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कला संस्कृति विकास योजना (केएसवीवाई) को प्रभावी ढंग से लागू कर रही है। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी देते हुए बताया कि यह एक अम्ब्रेला स्कीम है, जिसके तहत केंद्रीय क्षेत्र की कई उप-योजनाएं संचालित की जा रही हैं। योजना के माध्यम से देशभर के सांस्कृतिक संगठनों, कलाकारों और विशेष रूप से अनुसूचित जाति के कलाकारों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

राज्य-वार आवंटन का प्रावधान नहीं

मंत्री ने स्पष्ट किया कि केएसवीवाई केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, इसलिए इसमें राज्य-वार धनराशि निर्धारित करने का प्रावधान नहीं है। हालांकि, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में इस योजना के तहत आवंटित और वितरित राशि का विवरण प्रस्तुत किया गया। वर्ष 2022-23 में 214.32 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिनमें से 213.76 करोड़ रुपये जारी किए गए। वर्ष 2023-24 में 218.65 करोड़ रुपये में से 218.36 करोड़ रुपये वितरित हुए। वहीं 2024-25 में 207.24 करोड़ रुपये के आवंटन के विरुद्ध 201.67 करोड़ रुपये जारी किए गए।

गुरु-शिष्य परंपरा और सांस्कृतिक संगठनों को बढ़ावा

योजना के अंतर्गत गुरु-शिष्य परंपरा को प्रोत्साहन देने के लिए रिपर्टरी अनुदान दिया जाता है। इसके तहत नाटक, संगीत और नृत्य समूहों में एक गुरु और अधिकतम 18 शिष्यों को मासिक वित्तीय सहायता दी जाती है। गुरु को 15,000 रुपये प्रति माह तथा शिष्यों को आयु के अनुसार 2,000 से 10,000 रुपये तक की सहायता मिलती है।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले सांस्कृतिक संगठनों को एक करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाता है, जिसे विशेष परिस्थितियों में पांच करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं सांस्कृतिक समारोह और उत्पादन अनुदान (CFPG) के तहत सेमिनार, फेस्टिवल और शोध गतिविधियों के लिए 5 लाख से 20 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है।

विशेष क्षेत्रों और विरासत संरक्षण पर फोकस

हिमालयी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है, जिसे विशेष मामलों में 30 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। बौद्ध/तिब्बती संगठनों को सांस्कृतिक संरक्षण और अनुसंधान के लिए 30 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

स्टूडियो थिएटर, ऑडिटोरियम और अन्य सांस्कृतिक अवसंरचना के निर्माण हेतु मेट्रो शहरों में 50 लाख और गैर-मेट्रो शहरों में 25 लाख रुपये तक की अनुदान सहायता दी जाती है। टैगोर सांस्कृतिक परिसरों (टीसीसी) के निर्माण और आधुनिकीकरण के लिए अधिकतम 15 करोड़ रुपये तक की केंद्रीय सहायता का प्रावधान है।

छात्रवृत्ति, फेलोशिप और वरिष्ठ कलाकारों को सहायता

योजना के तहत युवा कलाकारों और शोधकर्ताओं के लिए स्कॉलरशिप और फेलोशिप भी दी जाती हैं। 18-25 वर्ष के युवा कलाकारों को दो वर्ष के लिए प्रति माह 5,000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है। वहीं 25-40 वर्ष (जूनियर) और 40 वर्ष से अधिक (सीनियर) आयु वर्ग के व्यक्तियों को दो वर्ष के लिए क्रमशः 10,000 और 20,000 रुपये मासिक फेलोशिप दी जाती है। टैगोर राष्ट्रीय सांस्कृतिक अनुसंधान फेलोशिप के तहत 80,000 रुपये तक मासिक फेलोशिप का प्रावधान है। 60 वर्ष से अधिक आयु के जरूरतमंद और वरिष्ठ कलाकारों को अधिकतम 6,000 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाती है, बशर्ते उनकी वार्षिक आय 72,000 रुपये से अधिक न हो।

सेवा भोज योजना भी शामिल

‘सेवा भोज योजना’ के तहत धार्मिक एवं चैरिटेबल संस्थाओं द्वारा संचालित लंगर, भंडारा और प्रसाद वितरण जैसी गतिविधियों में उपयोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों पर चुकाए गए सीजीएसटी और आईजीएसटी में केंद्र सरकार का हिस्सा वापस किया जाता है।

केंद्र सरकार का कहना है कि कला संस्कृति विकास योजना के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, कलाकारों को आर्थिक संबल देने और सांस्कृतिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने का कार्य निरंतर जारी है।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →
Share This Article