भ्रामक विज्ञापन पर बड़ी कार्रवाई, IAS कोचिंग संस्थान पर सरकार ने लगाया 7 लाख रुपये का जुर्माना

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली, 30 मई। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2023 के परिणामों को लेकर भ्रामक दावे करने के मामले में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने देश के चर्चित कोचिंग संस्थान वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने माना कि संस्थान ने सफल अभ्यर्थियों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर ऐसे विज्ञापन जारी किए, जो छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने वाले थे।

यह आदेश सीसीपीए की मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्रा की पीठ द्वारा पारित किया गया। प्राधिकरण ने कहा कि उपभोक्ताओं को किसी भी कोचिंग सेवा का चयन करने से पहले पूरी और सही जानकारी पाने का अधिकार है और संस्थान द्वारा तथ्यों को छिपाना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उल्लंघन है।

टॉप रैंकर्स के नाम पर किया गया प्रचार

सीसीपीए के अनुसार, यूपीएससी सीएसई 2023 के परिणाम आने के बाद संस्थान ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर बड़े-बड़े दावे प्रकाशित किए थे। इनमें कहा गया था कि शीर्ष 10 में से 8 रैंक धारक और शीर्ष 50 में से 37 उम्मीदवार वाजीराम एंड रवि से जुड़े थे। इसके अलावा यह दावा भी किया गया कि हर वर्ष यूपीएससी के जरिए चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी संस्थान के छात्र होते हैं।

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हालांकि जांच में सामने आया कि इन दावों में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया था। प्राधिकरण ने पाया कि शीर्ष 10 में शामिल बताए गए 8 उम्मीदवारों में से 7 ने संस्थान के केवल निःशुल्क इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम (IGP) में भाग लिया था। इसी तरह शीर्ष 50 में बताए गए 37 उम्मीदवारों में से 29 केवल इसी अल्पकालिक कार्यक्रम से जुड़े थे।

कोचिंग का भ्रम पैदा करने का आरोप

जांच में यह भी सामने आया कि इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम उस चरण में शुरू होता है, जब अभ्यर्थी यूपीएससी की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पहले ही अपने दम पर पास कर चुके होते हैं। यानी इन दोनों कठिन चरणों में संस्थान की कोई शैक्षणिक भूमिका नहीं होती।

इसके बावजूद संस्थान ने इन सफल उम्मीदवारों की तस्वीरों और उपलब्धियों का इस्तेमाल व्यापक कोचिंग विज्ञापनों में किया, जिससे यह धारणा बनी कि वे पूर्णकालिक कोचिंग कार्यक्रम के छात्र थे। सीसीपीए ने इसे जानबूझकर उपभोक्ताओं को भ्रमित करने की कोशिश माना।

महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना माना गया भ्रामक विज्ञापन

प्राधिकरण ने कहा कि संस्थान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि संबंधित उम्मीदवारों ने कौन-सा कोर्स किया था — जैसे कि फुल-टाइम क्लासरूम प्रोग्राम, वैकल्पिक विषय कोचिंग, टेस्ट सीरीज़ या केवल इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम। इस तरह की जानकारी छिपाना उपभोक्ताओं को सही निर्णय लेने से वंचित करता है।

सीसीपीए ने माना कि यह आचरण उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28)(iv) के तहत “भ्रामक विज्ञापन” की श्रेणी में आता है। साथ ही यह उपभोक्ताओं के “सूचित होने के अधिकार” का भी उल्लंघन है।

कोचिंग संस्थानों पर लगातार सख्ती

सीसीपीए ने बताया कि अब तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ 60 से अधिक नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें यूपीएससी, आईआईटी-जेईई, नीट, आरबीआई समेत अन्य परीक्षाओं की कोचिंग देने वाले संस्थान शामिल हैं।

प्राधिकरण के अनुसार, छात्रों के हितों की रक्षा और कोचिंग सेक्टर में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अब तक विभिन्न संस्थानों पर कुल 1.46 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है।

सरकार का कहना है कि शिक्षा और कोचिंग के क्षेत्र में झूठे दावे और भ्रामक प्रचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे तथा छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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