बिहार में कला विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सरकार गंभीर, मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने किया बड़ा ऐलान

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 1 जुलाई। बिहार में कला शिक्षा को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा है कि बिहार में कला विश्वविद्यालय की स्थापना की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है और राज्य सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। इसके लिए आवश्यक पहल भी शुरू कर दी गई है।

यह घोषणा बिहार संग्रहालय, इमामी आर्ट और कोलकाता सेंटर फॉर क्रिएटिविटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समकालीन कला प्रदर्शनी ‘विचित्र’ के उद्घाटन समारोह के दौरान की गई।

मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि ‘विचित्र’ केवल एक कला प्रदर्शनी नहीं, बल्कि विविध सांस्कृतिक दृष्टियों, रचनात्मक अभिव्यक्तियों और कलात्मक संवाद का सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि कला समाज, संस्कृति और समय के साथ निरंतर संवाद करती है तथा ऐसी प्रदर्शनियां लोगों को सांस्कृतिक विरासत को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह समेत कला जगत से जुड़े विशेषज्ञों और कलाकारों से प्रस्तावित कला विश्वविद्यालय की स्थापना में सहयोग देने का भी आग्रह किया।

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कार्यक्रम की शुरुआत में बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने अतिथियों और कलाकारों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में पश्चिम बंगाल की तीन पीढ़ियों के 14 कलाकारों की चित्रकला, मूर्तिकला और फोटोग्राफी सहित विभिन्न माध्यमों की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। उनके अनुसार यह प्रदर्शनी समकालीन कला की विविधता, प्रयोगशीलता और बहुआयामी अभिव्यक्तियों का उत्कृष्ट उदाहरण है।

बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार और बंगाल के बीच सांस्कृतिक, साहित्यिक और कलात्मक संबंध सदियों पुराने हैं। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के कलाकारों ने समय-समय पर एक-दूसरे की परंपराओं और रचनात्मक दृष्टियों को समृद्ध किया है और ‘विचित्र’ इसी साझा सांस्कृतिक विरासत का सशक्त प्रतीक है।

इमामी आर्ट तथा कोलकाता सेंटर फॉर क्रिएटिविटी की निदेशक उष्मिता साहू ने कहा कि ‘विचित्र’ शीर्षक केवल विविधता का प्रतीक नहीं, बल्कि कला की संवेदनशीलता, नवीन दृष्टि और रचनात्मक प्रयोगशीलता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में प्रदर्शित कलाकृतियां दर्शकों को प्रकृति, समाज, स्मृतियों और मानवीय अनुभवों पर नए सिरे से विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं।

कार्यक्रम में कला जगत से जुड़े प्रतिष्ठित कलाकार, कला समीक्षक, शिक्षाविद, विद्यार्थी, मीडिया प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कला प्रेमी मौजूद रहे। आयोजकों के अनुसार यह प्रदर्शनी भारतीय समकालीन कला की विविध अभिव्यक्तियों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी और बिहार संग्रहालय को समकालीन कला एवं सांस्कृतिक संवाद के अग्रणी केंद्र के रूप में नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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