NEWS PR डेस्क: दरभंगा, 05 जून। कठिन परिस्थितियां इंसान की परीक्षा जरूर लेती हैं, लेकिन जो व्यक्ति हिम्मत और संघर्ष के साथ आगे बढ़ता है, वही सफलता की नई कहानी लिखता है। दरभंगा जिले के हनुमाननगर प्रखंड अंतर्गत हनुमाननगर गांव की रहने वाली रामरती देवी ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। पति के निधन के बाद जहां उनके सामने परिवार चलाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया था, वहीं आज वे पशुपालन व्यवसाय के जरिए आत्मनिर्भर बनकर न सिर्फ अपने परिवार का सहारा बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
पति की मौत के बाद बढ़ी जिम्मेदारियां
रामरती देवी के पति स्वर्गीय रंजीत दास के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। पति के चले जाने के बाद परिवार का एकमात्र सहारा छिन गया था। आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी और बच्चों की पढ़ाई, भोजन, दवा तथा अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया था।

कई बार ऐसी स्थिति भी आई जब परिवार को दो वक्त का भोजन जुटाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। आर्थिक परेशानियों के कारण रामरती देवी मानसिक रूप से भी काफी परेशान रहने लगीं। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर परिवार को इस संकट से बाहर कैसे निकाला जाए।
जीविका समूह से जुड़ने के बाद बदली जिंदगी
इसी संघर्षपूर्ण दौर में रामरती देवी ने जीविका महिला समूह से जुड़ने का फैसला किया। वे “राधा जीविका महिला ग्राम संगठन” और “उपासना जीविका महिला समूह” से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई।

नियमित बैठकों और प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बचत, विशेष प्रबंधन, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के बारे में जानकारी मिली। जीविका से जुड़ी दीदियों और कर्मियों ने उन्हें लगातार प्रेरित किया और आगे बढ़ने का हौसला दिया। धीरे-धीरे रामरती देवी को यह भरोसा हुआ कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से वे अपने परिवार की स्थिति बदल सकती हैं।
सतत जीविकोपार्जन योजना बनी नई उम्मीद
रामरती देवी का चयन “सतत जीविकोपार्जन योजना (SJY)” के तहत किया गया। इस योजना के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और लगातार मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया। जीविका की ओर से उन्हें कुल 96 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई।
इस आर्थिक सहयोग ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। सहायता राशि का उपयोग कर उन्होंने पशुपालन व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने कुछ पशु खरीदे और पूरी लगन व मेहनत के साथ उनकी देखभाल शुरू की।
प्रशिक्षण और मेहनत से मिली सफलता
पशुपालन का कार्य रामरती देवी के लिए बिल्कुल नया था। शुरुआती दिनों में उन्हें पशुओं की देखभाल, चारे की व्यवस्था और बीमारियों से बचाव जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन जीविका की ओर से दिए गए प्रशिक्षण और समय-समय पर मिले मार्गदर्शन ने उनका काम आसान बना दिया।
उन्होंने प्रशिक्षण में सीखी बातों को व्यवहार में उतारा और मेहनत के साथ अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। परिणामस्वरूप पशुपालन से उनकी आय लगातार बढ़ने लगी। धीरे-धीरे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी और बच्चों की पढ़ाई तथा घरेलू जरूरतें आसानी से पूरी होने लगीं।
अब आत्मनिर्भर बन चुकी हैं रामरती देवी
आज रामरती देवी पशुपालन व्यवसाय से नियमित आय अर्जित कर रही हैं। उनका परिवार पहले की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में पहुंच चुका है। वे अब खुद को असहाय नहीं बल्कि आत्मनिर्भर और सक्षम महिला के रूप में देखती हैं।
गांव और समाज में भी उन्हें सम्मान और नई पहचान मिली है। उनकी संघर्ष और सफलता की कहानी अब अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रही है कि विपरीत परिस्थितियों में भी मेहनत और सही सहयोग के दम पर आत्मनिर्भर बना जा सकता है।
अब फेरी के जरिए बढ़ाना चाहती हैं कारोबार
रामरती देवी सिर्फ वर्तमान तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। भविष्य को लेकर भी उनकी स्पष्ट योजना है। वे आने वाले समय में फेरी के माध्यम से श्रृंगार सामग्री की दुकान शुरू करना चाहती हैं, ताकि परिवार की आय का अतिरिक्त स्रोत विकसित हो सके। उनका सपना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाएं, उन्हें आत्मनिर्भर बनाएं और परिवार को आर्थिक रूप से और मजबूत करें।
संघर्ष से सफलता तक की मिसाल
रामरती देवी की कहानी यह साबित करती है कि यदि महिलाओं को सही समय पर अवसर, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिले तो वे किसी भी कठिन परिस्थिति को अवसर में बदल सकती हैं।
सतत जीविकोपार्जन योजना और जीविका के सहयोग से उन्होंने न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और सामाजिक पहचान भी हासिल की।
आज वे उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखती हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि “हौसला, मेहनत और सही सहयोग मिल जाए, तो सफलता की राह में कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।”