NEWS PR डेस्क : पटना में बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को गंभीरता से लेते हुए पटना हाईकोर्ट ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है। पटना हाईकोर्ट की एकलपीठ के न्यायाधीश ने सुरेंद्र प्रसाद की याचिका पर सुनवाई करते हुए शहर की खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स और बढ़ते शोर प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की।
सुनवाई के दौरान अदालत के मित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता अजेय ने बताया कि गांधी मैदान, पीरबहोर और कदमकुआं थानों की ओर से जो रिपोर्ट दी गई है, उसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि शोर फैलाने वाले डीजे पर क्या कार्रवाई की गई। वहीं रूपसपुर और बुद्धा कॉलोनी थानों के थानेदारों ने अदालत के पूर्व आदेश के बावजूद अपनी रिपोर्ट जमा नहीं की।
अदालत ने गांधी मैदान, पीरबहोर और कदमकुआं थानों के थानेदारों को 15 नवंबर से 13 मार्च 2026 के बीच शोर प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए कदमों की नई रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। साथ ही रूपसपुर और बुद्धा कॉलोनी थानों के थानेदारों को रिपोर्ट न देने के कारण 10 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मसौढ़ी के एसडीएम और पटना के एसएसपी द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना भी की। सरकारी वकील Prashant Pratap ने अदालत को बताया कि ध्वनि प्रदूषण की शिकायत के लिए 0612-4575621 हेल्पलाइन शुरू की गई है और विवाह भवनों से Bihar Loudspeaker Act 1955 के पालन का आश्वासन लिया गया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश सिंह ने बताया कि फिलहाल शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स का डेटा केवल दानापुर, प्लैनेटेरियम और पाटलिपुत्र क्षेत्रों से ही लिया जा रहा है।
अदालत ने Bihar State Pollution Control Board को वायु और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई निजी लोगों के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों पर भी लागू होगी।
साथ ही अदालत ने सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर कचरा, सूखी पत्तियां और कागज जलाने पर रोक के लिए National Green Tribunal और Supreme Court of India के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा।
मामले की सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव Neeraj Narayan स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। अदालत ने उन्हें संबंधित अधिकारियों और वकीलों की बैठक बुलाकर पटना को वायु और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के मामले में एक मॉडल शहर बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और अगली सुनवाई में उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।