बिहार में 7 लाख छात्रों के डाटा में गड़बड़ी, शिक्षा विभाग ने 24 जिलों के DPO को भेजा नोटिस

ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर कुल 18 लाख 95 हजार 270 छात्रों का डाटा दर्ज है। विभाग की समीक्षा में सामने आया कि अब तक 11 लाख 86 हजार 744 छात्रों का डाटा सही किया जा चुका है, लेकिन करीब सात लाख छात्रों के विवरण में अब भी गलतियां बनी हुई हैं।

Asha Rai
बिहार में 7 लाख छात्रों के डाटा में गड़बड़ी ( AI Representative Image )
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NEWS PR डेस्क: बिहार के सरकारी स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक पढ़ने वाले करीब सात लाख छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड में गंभीर त्रुटियां पाई गई हैं। शिक्षा विभाग द्वारा ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज डाटा की जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मामले को गंभीर मानते हुए विभाग ने 24 जिलों के जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (योजना एवं लेखा) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर त्रुटियां सुधारने का निर्देश दिया गया है।

ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर कुल 18 लाख 95 हजार 270 छात्रों का डाटा दर्ज है। विभाग की समीक्षा में सामने आया कि अब तक 11 लाख 86 हजार 744 छात्रों का डाटा सही किया जा चुका है, लेकिन करीब सात लाख छात्रों के विवरण में अब भी गलतियां बनी हुई हैं। यह डाटा सुधार अभियान जून 2025 में शुरू किया गया था और सभी जिलों को जनवरी 2026 के अंत तक शत-प्रतिशत डाटा शुद्ध करने के निर्देश दिए गए थे।

शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि इन छात्रों के डाटा में समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो उन्हें छात्रवृत्ति, मुफ्त किताबें, पोषण और अन्य सरकारी लाभुक योजनाओं का लाभ मिलने में दिक्कत हो सकती है। ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर छात्रों का सही विवरण दर्ज करना स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है, जबकि इसकी निगरानी और जवाबदेही डीपीओ (योजना एवं लेखा) की होती है। इसमें छात्र का नाम, पिता का नाम, पता, आधार नंबर सहित अन्य जरूरी जानकारियां सही-सही दर्ज करना अनिवार्य है।

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विभाग ने भागलपुर, अररिया, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, गया, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, खगड़िया, किशनगंज, कटिहार, लखीसराय, मधुबनी, मुंगेर, कैमूर, नालंदा, सहरसा, समस्तीपुर, सारण, सुपौल, सीवान और वैशाली जिलों के डीपीओ से जवाब तलब किया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सज्जन आर ने यह भी स्पष्ट किया है कि पिछली लाभुक आधारित योजनाओं की समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहने को लेकर भी संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

जिलावार आंकड़ों के अनुसार, गया में 45,355, सारण में 50,482, जमुई में 32,141, भोजपुर में 27,892, पटना में 37,740, गोपालगंज में 33,775, सीतामढ़ी में 49,063, औरंगाबाद में 28,895, मुंगेर में 13,410, भागलपुर में 32,577, जहानाबाद में 7,569, लखीसराय में 8,592, सीवान में 25,812, कटिहार में 28,100, वैशाली में 23,034, नालंदा में 20,071, मुजफ्फरपुर में 34,192, मधुबनी में 33,410, अरवल में 3,770, दरभंगा में 26,633, पूर्वी चंपारण में 33,229, अररिया में 12,655, सुपौल में 13,678, सहरसा में 11,360, समस्तीपुर में 15,907, किशनगंज में 8,678, रोहतास में 8,136, शेखपुरा में 1,956, बांका में 6,290, पश्चिम चंपारण में 9,862, मधेपुरा में 5,893, पूर्णिया में 9,292, बक्सर में 1,450, बेगूसराय में 2,276, खगड़िया में 1,210, शिवहर में 358 और कैमूर में 484 छात्रों के डाटा में गड़बड़ियां पाई गई हैं।

शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तय समय सीमा के भीतर छात्रों के डाटा को दुरुस्त किया जाए, ताकि किसी भी छात्र को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न होना पड़े। विभाग ने चेतावनी दी है कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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