NEWS PR डेस्क: पटना, 14 अप्रैल। बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ गया है। लंबे समय से राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसके साथ ही प्रदेश में ‘नीतीश युग’ के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन हो गया।
कैबिनेट की आखिरी बैठक में ही मंत्रिपरिषद भंग करने की अनुशंसा कर दी गई थी, जिससे नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया था। इस्तीफे के बाद अब राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है।
राजधानी पटना में सियासी गतिविधियां चरम पर हैं। भाजपा नेतृत्व पहले से ही सक्रिय है और विधायक दल की बैठक के जरिए नए नेता के चयन की तैयारी चल रही है। केंद्रीय स्तर से भी वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया है।
नीतीश कुमार का कार्यकाल बिहार की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव और गठबंधन परिवर्तनों के लिए जाना जाता रहा है। उन्होंने अलग-अलग समय में विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई और राज्य की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया।
अब सभी की निगाहें नई सरकार के गठन और अगले मुख्यमंत्री के नाम पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में बिहार की राजनीतिक दिशा तय करेगा।