फर्जी दस्तावेजों पर करोड़ों का लोन! कोटक महिंद्रा बैंक में बड़े घोटाले का खुलासा

कोटक महिंद्रा बैंक में 3.80 करोड़ रुपये के फर्जी व्हीकल लोन का खुलासा, दो बैंक अधिकारियों समेत 28 पर एफआईआर

Rashmi Tiwari
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NEWS PR डेस्क:गया: शहर के वीआईपी इलाके जीबी रोड स्थित जिला स्कूल के पूर्वी गेट के पास संचालित कोटक महिंद्रा बैंक की शाखा में करोड़ों रुपये के कथित व्हीकल लोन घोटाले का मामला सामने आया है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करीब 3 करोड़ 80 लाख रुपये के वाहन ऋण स्वीकृत कर बैंक को बड़ा वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया। मामले में बैंक के सहायक प्रबंधक की शिकायत पर सिविल लाइंस थाना में दो सेवारत बैंक अधिकारियों सहित कुल 28 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।


इंटरनल ऑडिट में खुली फर्जीवाड़े की परतें
बैंक के सहायक प्रबंधक कुमार दीपेश द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, यह कोई साधारण लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित धोखाधड़ी का मामला है। आरोप है कि बैंक को गुमराह करने के लिए वाहनों से संबंधित फर्जी, एडिटेड और मनगढ़ंत दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिनके आधार पर करोड़ों रुपये के लोन स्वीकृत कर दिए गए।
घोटाले का खुलासा तब हुआ जब बैंक की केंद्रीय टीम ने इंटरनल ऑडिट के दौरान संदिग्ध लोन खातों का सत्यापन किया। जांच में कई फाइलों में दर्ज इंजन नंबर, चेसिस नंबर, वाहन स्वामित्व और फाइनेंस संबंधी दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां मिलीं। कई मामलों में जिन वाहनों के नाम पर ऋण स्वीकृत हुआ, उनका रिकॉर्ड संदिग्ध या अपूर्ण पाया गया।
दो बैंक अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में
एफआईआर में बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर वारिस आजम और टीम सेल्स मैनेजर रोहित राज को भी नामजद किया गया है। शिकायत के मुताबिक, वाहन लोन की मंजूरी और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में दोनों अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही है। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या नियमों की अनदेखी कर कमीशन के लालच में लोन स्वीकृत किए गए या फिर यह पूरा नेटवर्क किसी बड़े संगठित रैकेट का हिस्सा था।
गया और पटना के 26 अन्य लोग भी नामजद
मामले में बैंक अधिकारियों के अलावा गया, आसपास के क्षेत्रों और पटना के रहने वाले 26 कथित लोन धारकों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी नामजद आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। सिविल लाइंस थाना पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी है। परिवहन विभाग के सहयोग से लोन पर वित्तपोषित वाहनों के चेसिस और इंजन नंबरों का मिलान कराया जा रहा है। साथ ही आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
सिटी एसपी बोले— जांच प्रारंभिक चरण में
सिटी एसपी अभिनव ने बताया कि मामला अभी शुरुआती जांच के चरण में है। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन कई पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। सभी तथ्यों की पुष्टि और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले पर बैंक का पक्ष जानने के लिए शाखा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन महीने का चौथा शनिवार होने के कारण शाखा बंद मिली। एटीएम पर तैनात सुरक्षा गार्ड ने बैंक बंद होने की पुष्टि की। गया से आशिष कुमार की रिपोर्ट

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