NEWS PR डेस्क: गया के एक निजी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शहर के प्रतिष्ठित अर्श हॉस्पिटल प्रबंधन ने प्रेसवार्ता आयोजित कर एक चिकित्सक पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने और स्वयं को विशेषज्ञ डॉक्टर बताने के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं आरोपी डॉक्टर ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया है।

अस्पताल प्रबंधन ने उठाए दस्तावेजों पर सवाल
अस्पताल प्रबंधन और समाजसेवी हरि प्रपन्न ने प्रेसवार्ता के दौरान दावा किया कि टिकेंदर कुमार शर्मा द्वारा प्रस्तुत किए गए शैक्षणिक और पहचान संबंधी दस्तावेजों की जांच में कई विसंगतियां सामने आई हैं।अस्पताल के अनुसार, दिल्ली मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि 26 नवंबर 1986 दर्ज है, जबकि पैन कार्ड और आधार कार्ड में जन्मतिथि 11 नवंबर 1985 अंकित बताई गई है। प्रबंधन का कहना है कि इन तथ्यों ने दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2022 से नौकरी, 2023 में एमबीबीएस का दावा
अर्श हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. नवनीत निश्छल ने आरोप लगाया कि संबंधित डॉक्टर ने वर्ष 2023 में किर्गिस्तान से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त करने और 2024 में दिल्ली मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने का दावा किया है। जबकि अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार वह वर्ष 2022 से ही संस्थान में कार्यरत था और नियमित रूप से वेतन प्राप्त कर रहा था।अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि पिछले चार वर्षों के दौरान आरोपी को लगभग ढाई करोड़ रुपये वेतन के रूप में भुगतान किया गया।
विशेषज्ञ डॉक्टर होने का दावा करने का आरोप
प्रबंधन ने आरोप लगाया कि संबंधित चिकित्सक स्वयं को गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट बताता था और योग्य विशेषज्ञ डॉक्टरों को गया आने से हतोत्साहित करने का प्रयास करता था। साथ ही शिकायत उठाने वाले अस्पताल अधिकारियों को कथित रूप से धमकियां दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि मामले से जुड़े दस्तावेज, बैंक लेन-देन का विवरण और कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंप दी गई हैं, जिनकी जांच की जा रही है। गया से आशिष कुमार की रिपोर्ट
