इस्तीफे की तारीख को लेकर नई चर्चा, नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की अटकलों से बिहार में सियासी हलचल

Neha Nanhe

NEWS PR डेस्क : नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, वे 8 या 9 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। उनके इस्तीफे के बाद राज्य में नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने की चर्चाओं के बीच बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि वे मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, संभव है कि वे 8 या 9 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दें। हालांकि इसको लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राज्यसभा जाने की खबर के बाद सियासी अटकलों का दौर शुरू हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चा

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि यदि नीतीश कुमार इस्तीफा देते हैं तो राज्य में नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। बताया जा रहा है कि 16 मार्च के बाद इस मुद्दे पर औपचारिक रूप से बातचीत तेज हो सकती है। गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर कई नामों पर विचार होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अभी तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

निशांत कुमार की भूमिका पर भी कयास

इन अटकलों के बीच मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार का नाम भी चर्चा में है। हाल के समय में उनकी राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है और वे लगातार पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे हैं। इसी वजह से उनके भविष्य की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ सूत्रों का मानना है कि उन्हें पार्टी या राजनीति में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, हालांकि इस पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

गठबंधन के समीकरण पर भी नजर

अगर राज्य के नेतृत्व में बदलाव होता है तो गठबंधन के भीतर मंत्रालयों के बंटवारे पर भी चर्चा हो सकती है। खास तौर पर गृह मंत्रालय को लेकर भारतीये जनता पार्टी की भूमिका अहम मानी जा रही है। फिलहाल इस मुद्दे पर गठबंधन के नेता खुलकर कुछ नहीं कह रहे हैं।

सियासी हलचल तेज

राज्यसभा को लेकर उठी इन चर्चाओं ने बिहार की राजनीति को गर्मा दिया है। सत्ता और विपक्ष दोनों ही इस संभावित बदलाव पर करीबी नजर रखे हुए हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में स्थिति साफ हो सकती है, जबकि कुछ लोग इसे महज राजनीतिक अटकलें बता रहे हैं। जब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक यह मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बना रहेगा।

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